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#गृह मंत्री अमित शाह के दो दिवसीय सीमांचल दौरे से वह राजनीतिक हलचल तेज!!

#गृह मंत्री अमित शाह के दो दिवसीय सीमांचल दौरे से वह राजनीतिक हलचल तेज!!

-सीमांचल में भी मुस्लिम बहुतायत में

-सीमांचल का राजनीतिक इतिहास

-असदुद्दीन ओवैसी का नया गढ़

-किशनगंज सीट से एक बार जीते हैं शाहनवाज हुसैन

-सीमांचल के बाद बिहार में कहां जाएंगे अमित शाह

अशोक झा,सिलीगुड़ी: 23 सितम्बर को अपने सीमांचल दौरे के दौरान गृह मंत्री और भाजपा नेता अमित शाह कई मुद्दों को एक साथ साधने की कोशिश करेंगे। नितीश कुमार से अलग होने के बाद पहली बार दो दिवसीय सीमांचल दौरे पर आ रहे हैं। गृह मंत्री के दौरे को लेकर अभी से जिला पुलिस प्रशासन पूरी तरह चुस्त-दुरुस्त हो गई है। लगातार संवेदनशील इलाकों में गहन जांच की जा रही है। सीमांचल का राजनितिक, सामाजिक के साथ-साथ ही रणनीतिक महत्व भी हैं। सीमांचल चिकन नेक, जिसे सिलीगुड़ी गलियारा भी कहा जाता हैं, के काफी करीब है जहाँ देश के उत्तर और दक्षिण की लम्बाई लगभग 22 किमी तक सिमट कर आ जाती है. यहाँ पश्चिम बंगाल के अलावा नेपाल की सीमा भी मिलती है. यहां से नेपाल के अलावा भूटान और बांग्लादेश की सीमा भी बहुत नजदीक हैं। इसलिए सीमांचल का अपना राजनीतिक महत्व है। सीमांचल में भी मुस्लिम बहुतायत में केरल के मालाबार और पश्चिम उत्तर प्रदेश की तरह सीमांचल भी मुस्लिम बहुतायत के लिए जाना जाता  है। सीमांचल के चार जिलों – पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज और अररिया को मिलाकर इसकी आबादी लगभग 1 करोड़ है। इसकी आबादी में मुसलमानों के बड़े अनुपात के कारण यह सामाजिक-राजनीतिक महत्व रखता है। बिहार के राज्यव्यापी औसत 17% और अखिल भारतीय औसत 14% के मुकाबले इन जिलों में औसतन 47% मुसलमान हैं। इस क्षेत्र में लेकिन पिछले छह आम चुनावों में चुनावी भागीदारी में उल्लेखनीय उत्साह देखा गया है. 2019 में सीमांचल में 64.8% मतदान हुआ, जो बिहार के 58.6% के औसत से बहुत अधिक था। पिछले पांच आम चुनावों में, सीमांचल में औसत मतदान राज्य के औसत मतदान से लगभग पांच प्रतिशत अंक अधिक था। जाहिर है क्षेत्र के मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने की परवाह करते हैं।

सीमांचल का राजनीतिक इतिहास

यहां की राजनीति में कई उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. इस क्षेत्र के किशनगंज लोकसभा की सीट पर 1989 में कांग्रेस से वरिष्ठ पत्रकार एमजे अकबर चुने गए थे। 1991 के लोकसभा चुनाव में जनता दल जिसमें लालू यादव और नीतीश कुमार दोनों शामिल थे, ने कटिहार लोकसभा सीट से बिहार के तत्कालीन राज्यपाल यूनुस सलिम को अपना उम्मीदवार बनाया था और वो यहां से सांसद बने था।  इस तरह की राजनीति जब राज्यपाल ही लोकसभा का उम्मीदवार बन जाये, यह अमूमन घटना देश में सिर्फ एकबार ही हुई. कटिहार सीट पर ही 1996 में देश के पूर्व गृह मंत्री मुफ़्ती मोहमद सईद जनता दल उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़े।  मगर उन्हें तत्कालीन कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार तारिक़ अनवर के हाथों करारी हार का सामना करना पड़ा। मुफ़्ती मुहम्मद सईद कटिहार सीट पर मतों के क्रम में तीसरे पायदान पर रहे थे।

असदुद्दीन ओवैसी का नया गढ़

पिछले विधानसभा चुनाव में इस क्षेत्र में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन का प्रदर्शन ना सिर्फ राज्य बल्कि पूरे देश में चर्चा का विषय बनी रही। इस क्षेत्र से इस पार्टी को 5 सीटों पर जीत मिली। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन का इतना उम्दा प्रदर्शन अपने परम्परागत क्षेत्र तेलंगाना और विशेषकर हैदराबाद के बाहर विधानसभा चुनाव में देखने को नहीं मिला था। अगले लोकसभा चुनाव में किशनगंज लोकसभा सीट पर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन की जीत की प्रबल सम्भावना दिख रही है। किशनगंज हैदराबाद और महाराष्ट्र के औरंगाबाद के बाद तीसरी लोकसभा सीट बन सकती है जिसपर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन अपनी मौजूदगी दर्ज़ कर सकती हैं। सीमांचल ओवैसी का नया गढ़ बनता दिख रहा हैं। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन सीमांचल के रास्ते पश्चिम बंगाल के मुस्लिम बाहुल्य इलाकों जैसे मालदा और मुर्शिदाबाद में अपनी पाँव ज़माने का प्रयास कर सकती हैं। सीमांचल हाल के दिनों में अवैध बांग्लादेशियो और म्यांमार के शरणार्थियों के प्रवेश द्वार के रूप में कुख्यात होता जा रहा हैं। हाल के समय अवैध बांग्लादेशियो और म्यांमार के शरणार्थियों की कई ऐसी टोलिया कटिहार और आसपास के इलाको में पकड़ी गई हैं।  जो देश के अन्य भागों में देह व्यापार और अन्य कई कार्यों के लिए लेकर जाया जा रहा था। साथ ही स्थानीय लोगो के मुताबिक इस इलाके से होकर मवेशियों का बड़े पैमाने पर भी चोरी-छुपे बांग्लादेश में अवैध व्यापार किया जा रहा है। कुछ लोगों का मानना है कि गृह मंत्री अमित शाह के बिहार दौरे पर इस तस्करी का मुद्दा भी अहम रूप से उठेगा।

किशनगंज सीट से एक बार जीते हैं शाहनवाज हुसैन

राजनीतिक तौर पर अभी तक दो मुस्लिम मुख़्तार अब्बास नक़वी और शाहनवाज़ हुसैन लोकसभा के लिए भाजपा से चुने गए हैं। शाहनवाज़ हुसैन 1999 में किशनगंज लोकसभा सीट से सांसद चुने गए थे और और उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में भी शामिल किया गया था। कटिहार लोकसभा सीट से मुस्लिमों के मत विभाजन के कारण भाजपा के निखिल चौधरी कई बार चुनाव में जीत दर्ज़ कर चुके हैं। निखिल चौधरी तारिक़ अनवर को मामूली वोटो के अंतर से चुनाव हराते थे। जबकि दसूरे मुस्लिम प्रत्यासी अशफ़ाक़ करीम मुस्लिम मतों में विभाजन कर देते थे। वर्तमान में अशफ़ाक़ करीम राजद से राज्यसभा सांसद हैं। तस्लीमुद्दीन लम्बे समय तक सीमांचल में राजद के चेहरा बने रहे। 2019 के लोकसभा चुनाव में तब की एनडीए एकमात्र सीट किशनगंज ही कांग्रेस पार्टी के मोहमद जावेद के हाथो हारी थी। किशनगंज/सीमांचल उन खास क्षेत्रो में शामिल हैं जहाँ अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का केंद्र स्थापित है। अन्य राज्यों में पश्चिम बंगाल और केरल में यह केंद्र स्थापित है।

सीमांचल के बाद बिहार में कहां जाएंगे अमित शाह

गृह मंत्री के तौर पर अमित शाह के आने से अवैध घुसपैठ का मुद्दा भी तूल पकड़ सकता है। ऐसा वहां के स्थानीय लोगों का आकलन है। अमित शाह इससे पूर्व बिहार दौरे पर दक्षिण बिहार के सासाराम में आये थे। इस बार उनकी यात्रा पूर्वोत्तर बिहार में हो रही है। ऐसा अनुमान हैं कि अमित शाह की अगला बिहार यात्रा तिरहुत और सारण प्रमंडल के मिलनबिंदु के आसपास हो सकती हैं। रिपोर्ट अशोक झा

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