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 #राधाअष्टमी कल, इस्कॉन मंदिर में की गई है भव्य तैयारी!!

 #राधाअष्टमी कल, इस्कॉन मंदिर में की गई है भव्य तैयारी!!
-राधा जी को आदि शक्ति के रुप में पूजा जाता है,जीवन की शक्ति ही इन दोनों का संगम है
अशोक झा, सिलीगुड़ी: राधा अष्टमी भगवान कृष्ण के जन्म के 15 दिन बाद ही पड़ती है। जन्माष्टमी पूजा राधाष्टमी की पूजा के बिना अधूरी मानी जाती है। को लेकर सिलीगुड़ी इस्कॉन मंदिर में भक्त तैयारी की जा रही है। बड़े धूमधाम से रविवार को यह उत्सव मनाया जाएगा। तो आइए जानते हैं कौन सा दिन है। राधा जन्म का समय राधा अष्टमी के रुप में देश भर में श्रद्धा विश्वास के साथ मनाया जाता है। राधा जी को आदि शक्ति के रुप में पूजा जाता है। प्रकृति में जितने गुण मौजूद हैं उन्हीं के द्वारा उपस्थित हैं। भगवान श्री कृष्ण के साथ राधा जी का आत्मा के स्वरुप में प्रकट होता है। जीवन की शक्ति ही इन दोनों का संगम है। इन्हीं के द्वारा प्राण शक्ति सभी में निहित है।

देश भर में होती है राधाष्टमी की धूम 
राधा अष्टमी का व्रत करने से जीवन में प्रेम, सुख-समृद्धि, शांति का वास होता है। ऐसा माना जाता है कि जन्माष्टमी की पूजा का फल तभी मिलता है जब राधाष्टमी का व्रत और पूजा की जाती है। राधाष्टमी के दिन मथुरा, वृंदावन और बरसाने में उतना ही उत्साह रहता है, जितना भगवान कृष्ण की जयंती पर होता है। पंचाग के अनुसार राधा रानी का जन्म भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को हुआ था। इस बार राधा अष्टमी का व्रत और पूजा रविवार 4 सितंबर 2022 को होगी. राधा अष्टमी के दिन राधा रानी और भगवान कृष्ण की पूजा करने से दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

राधा अष्टमी शुभ मुहूर्त
अष्टमी तिथि प्रारंभ – शनिवार 03 सितंबर 2022 दोपहर 12:25 बजे
अष्टमी तिथि समाप्त – रविवार 04 सितंबर 2022 सुबह 10:40 बजे।
उदया तिथि के अनुसार राधा अष्टमी का पर्व 04 सितंबर को मनाया जाएगा। इस दिन देवी का पूजन विविध रुप से किया जाता है। मंदिरों में राधा जी के दर्शनों के लिए श्रृद्धालु भक्ति भाव के साथ उपस्थित होते हैं।

राधा अष्टमी पूजा विधि
राधा अष्टमी के दिन सूर्योदय से पहले स्नान करें, देवी की पूजा करें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद पूजा स्थल पर एक कलश में जल रखें। किसी चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाएं और उस पर भगवान राधा की मूर्ति के साथ भगवान कृष्ण को स्थापित करें। इसके बाद राधा रानी को पंचामृत से स्नान कराकर उन्हें वस्त्र और आभूषण पहनाएं। इसके बाद फल और फूल और मिठाई अर्पित करें और राधा कृष्ण के मंत्रों का जाप करें. साथ ही इस दिन देवी के जन्म की कथा भी सुनें  अंत में राधा कृष्ण की आरती करें। रिपोर्ट अशोक झा

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