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गणेश उत्सव आज से,बप्पा का जीवन और उनका शरीर हमें लाइफ मेंनेजमेंट के गुर सिखाता है

गणेश उत्सव आज से,बप्पा का जीवन और उनका शरीर हमें लाइफ मेंनेजमेंट के गुर सिखाता है
-गणपति से कैसे सीखें लाइफ मनैजमैंट के गुर,रिद्धि सिद्धी के दाता
अशोक झा, सिलीगुड़ी: गणेशोत्सव बड़े ही धूमधान से मनाया जा रहा है। ‘तंत्र साहित्य’ में गणेश की महिमा को अपरंपार बताई गई है। यही नहीं इन्हें अंतर्मन की शक्तियों को जाग्रत करनेवाले देवता भी कहा जाता हैं। रिद्धि सिद्धी के दाता हैं। इनकी पूजा करने से किसी भी कार्य में कोई विघ्न पैदा नहीं होता। भगवान गणेश विद्या और बुद्धि के देवता है। कहा जाता है कि अगर चतुर्थी के दिन बिना कुछ खाए पीए भगवान गणेश की श्रृद्धा पूर्वक पूजा की जाए तो भगवान गणेश विद्या का दान देते हैं। गणपति गणेश बड़े सिर वाले हैं, गजानन हैं, ऊंचा माथा है, बड़े बड़े कान हैं एक दांत, मोटा पेट और लंबी सूंड है। बप्पा का जीवन और उनका शरीर हमें लाइफ मेंनेजमेंट के गुर सिखाता है।
कहा जाता है कि एक बार कार्तिकेय और भगवान गणेश दोनों अपनी शादी कराने के लिए अड़ गए। माता गौरी ने शर्त रखी जो पुत्र पहले पूरी पृथ्वी की परिक्रमा कर वापस लौटेगा उस का विवाह पहले किया जाएगा। कार्तिकेय भगवान पूरी पृथ्वी की परिक्रमा करने के लिए निकल गए लेकिन भगवान गणेश ने अपने माता पिता की परिक्रमा कर ये पूरे जगत को ये संदेश दिया। कि माता पिता ही जगत का आधार हैं। वे ही पूरी पृथ्वी हैं। आइये जानतें है गणपति से कैसे सीखें लाइफ मनैजमैंट के गुर।भगवान गणेश की सिर बड़ा और माथा ऊंचा है। जिसका अर्थ है कि बड़ा सोचें। इधर उधर की बातों को दिमाग से निकालें और अपने काम पर फोकर करें। भगवान गणेश गजानन हैं जिसके कान सूपे जैसे बड़े हैं। इसका अर्थ है आप सिर्फ मतलब की बातों को ग्रहण करें बाकी जैसे सूप छिलके बार छोड़ देता है वैसे छोड़ दें। भगवान गणेश की आखें बताती हैं कि जीवन में सूक्ष्म दृष्टि रखनी चाहिए। सूंड दूरदर्शिता का प्रतीक है और एक आधा टूटा दांत प्रतीक है कि जीवन में कोई ना कोई कमी रहती ही है लेकिन हमें सकारात्मकता के साथ जीवन में आगे बढ़ना चाहिए। भगवान गणेश बड़े पेट वाले हैं। जो हमें सिखाते हैं कि पेट समुद्र की तरह होना चाहिए। जिसमें अच्छी बुरी हर बात समा जाए। रिद्धि सिद्धि के साथ भगवान गणपति सिखाते हैं कि जिसके बाद बुद्धि और विद्या है उसी के पास सुख और शांति हैं। इसलिए बुद्धि का सदुपयोग करें। बैठे हुए गणपति के पैर जमीन को छूते हैं जो हमें बताते हैं कि आसमान को छू लेने के बाद भी जमीन का साथ नहीं छोड़ना चाहिए। गणपति चूहे की सवारी करते हैं। वे सीख देते हैं कि संसार में कोई भी चीज छोटी या व्यर्थ नहीं समझनी चाहिए। इतिहास सम्मत तथ्य है कि विश्व का प्रथम लोकतंत्र ‘वैशाली’ (भारत) में अस्तित्ववान था। पर पुराख्यानों के आधार पर भगवान गणेश गणतंत्र के प्रथम प्रस्तोता हैं। ‘गण’ अर्थात समूह के नायक जिनकी समूची कार्यप्रणाली एवं प्रतीकात्मकता इसी तंत्र को समृद्ध करती है। इस तंत्र के नियोक्ता, संचालक वे हैं जो ‘दूर्वा’ (सर्वहारा) से लेकर ‘बरगद'(कुबेर) तक न्यायिक रचना का विस्तार करते हैं. वे सूपकर्ण हैं. सभी की बात सुनते हैं।
लंबोदर क्यों नायक या नेता है?

लंबोदर इसलिए कि एक नायक या नेता को कितनी ही अप्रिय बातें पचानी होती हैं। उनकी छोटी-छोटी आंखें मनोभाव छिपाने की कला से अवगत कराती हैं। सर्वविदित है कि हमारे समस्त देवता अस्त्र-शस्त्रों से सज्जित रहते हैं। यहां तक कि देवियां भी। गणेश भी ‘पाश’ और ‘अंकुश’ धारण करते हैं, क्योंकि दुर्जनों के लिए दंड विधान जरूरी है।

‘तंत्र साहित्य ‘ में लंबोदर क्या है

आवश्यकता है इस बात की कि पौराणिक गाथा को प्रतीक पूजा या प्रदर्शनप्रियता की परिधि में न बांधा जाए। निहितार्थ अंगीकृत करना जरूरी है। पौराणिक इतिहास का रुख करें तो हम पाते हैं कि गणेश ‘शुभंकर’ हैं। ज्ञान के देवता हैं।दक्षिण भारत में कलाओं के प्रेरक, संरक्षक। किसी भी काम की श्रेष्ठ परिणति के लिए उनका आह्वान किया जाता है। ‘तंत्र साहित्य ‘ में गणेश की महिमा अपरंपार है। वे पंचतत्वों, धरती और अंबर में समाहित हैं. अंतर्मन की शक्तियों को जाग्रत करनेवाले देवता हैं वे।

पूरी दुनिया में मनाई जाती है गणेशोत्सव

गणेश प्रथम लिपिकार हैं। ईश्वरीय आदेश पर व्यासमुनि के लिए महाभारत का लेखन भी किया उन्होंने। गणेशोत्सव भारत-भू तक सीमित नहीं, चीन, जापान, मलाया, इंडोनेशिया, कंबोडिया, थाईलैंड और मैक्सिको तक में मनाया जाता है। वस्तुतः गणेश पूजा आत्मतत्व का स्मरण, जागरण और स्वीकृति है। एक सर्वव्यापक विराट दृष्टिकोण विकसित करने की दिशा में प्रतिवर्ष का आयोजन, जिसकी वर्तमान में महती आवश्यकता है। रिपोर्ट अशोक झा

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