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#गणेश चतुर्थी के दिन मिथिला में होती है, धूमधाम से चांद की पूजा। जानिए पुरी बात!!

#गणेश चतुर्थी के दिन मिथिला में होती है, धूमधाम से चांद की पूजा। जानिए पुरी बात!!

जिस समय गणेश चतुर्थी (भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि) मनाई जाती है अर्थात उसी समय चौरचन भी मनाया जाता है। चौरचन के त्यौहार को चौठ चंद्र त्यौहार भी कहा जाता है। विशेष रूप से यह त्योहार बिहार के मिथिला में मनाया जाता है।

यहां पर पूरी धूमधाम से गणेश चतुर्थी के साथ-साथ चौरचन का त्यौहार मनाया जाता है। इस त्योहार पर चंद्र देव की पूजा अर्चना की जाती है क्योंकि कहती है कि जो व्यक्ति इस दिन शाम के समय भगवान गणेश के साथ-साथ चंद्र देव की पूजा करते हैं वह चंद्र दोष से मुक्त हो जाते हैं।

पुरातन मान्यताओं के अनुसार भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के दौरान चंद्रमा को कलंक लगा था, इसीलिए इस दिन चांद को देखना पूरी तरह से मना किया जाता है। बाकी त्योहारों की तरह यह त्यौहार भी अलग-अलग मान्यताओं से परिपूर्ण है।

मिथिला एक ऐसा देश है जहां पर प्रकृति से जुड़े हुए काफी सारे त्यौहार मनाए जाते हैं; जैसे कि सूर्य देव की आराधना करने के लिए छठ पर्व मनाए जाते हैं तो इसी तरह चंद्र देव की आराधना करने के लिए चौरचन का त्योहार मनाया जाता है।

इस त्यौहार की महत्वता इसीलिए है क्योंकि कहते हैं कि चंद्र देव की पूजा करने से व्यक्ति झूठे कलंक से बच जाता है। कहती हैं कि इस दिन यदि चंद्र देव की पूजा अर्चना की जाए तो चंद्र देव प्रसन्न होते हैं और व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूर्ण कर देते हैं।
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Reported by soyeta

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