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31 अगस्त से गणपति महोत्सव का शुभारंभ

31 अगस्त से गणपति महोत्सव का शुभारंभ
– 10 दिनों तक  गणपति बप्पा मोरिया सुनाई देगी गुंज
अशोक झा, सिलीगुड़ी: हर साल बड़े ही धूम धाम से गणपति उत्सव मनाया जाता है। बंगाल में दुर्गा पूजा के साथ अब गणपति पूजा जोर शोर से मनाया जा रहा है। बड़े पैमाने पर गणपति बाप्पा का 10 दिनों तक चलने वाला महापर्व गणेशोत्सव 31 अगस्त, दिन बुधवार से शुरू होने जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि और स्वाति नक्षत्र में दोपहर के समय भगवान गणपति का जन्म हुआ था। इस कारण से हर वर्ष गणेश जन्मोत्सव का त्योहार उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस बार गणेशोत्सव की शुरुआत बहुत ही शुभ और विशेष योग में हो रही है। बुधवार से गणेश उत्सव प्रारंभ है और बुधवार का दिन भगवान गणेश की पूजा-अर्चना के लिए विशेष महत्व रखता है। बुधवार के देवता भगवान गणेश जी को माना गया है और इस दिन के ऊपर बुध ग्रह का स्वामित्व प्राप्त है। 
बुधवार,31 अगस्त को ग्रहों की स्थिति कैसी रहेगी
इस बार गणेश उत्सव बुधवार और चित्रा नक्षत्र में शुरू होगा। इसके अलावा इस दिन बुध, चंद्रमा के साथ स्वराशि यानी कन्या में रहेंगे। कन्या राशि बुध की उच्च राशि मानी गई है। इसके अलावा सूर्य, शनि और गुरु जो सभी ग्रहों में काफी महत्वपूर्ण माने जाते हैं ये सभी अपनी-अपनी राशि में मौजूद रहेंगे। सूर्य की स्वयं की राशि सिंह हैं, शनि की स्वराशि कुंभ और मकर है जबकि गुरु की स्वयं की राशि मीन है। वर्ष 2022 में गणेश उत्सव की शुरुआत चित्रा नक्षत्र के साथ हो रही है जबकि गणेश उत्सव के आखिरी दिन धनिष्ठा नक्षत्र का योग है। चित्रा और धनिष्ठा नक्षत्र के स्वामी मंगल ग्रह हैं।  भगवान गणेश की पूजा से शुरू होती है क्योंकि उन्हें विघ्नहर्ता के रूप में जाना जाता है।भगवान गणेश को एकदंत, गजानन, सिद्धि विनायक, धम्रकेतू जैसे अन्य नाम से भी जाना जाता है। जानें इस वर्ष कब है गणेश चतुर्थी, मूर्ति स्थापना का शुभ मुहूर्त, विसर्जन के संबंध में विस्तार से बता रहे हैं। 

कैसे हो गणेशजी की मूर्ति: घर, आफिस या अन्य सार्वजनिक जगह पर गणेश स्थापना के लिए मिट्टी की मूर्ति बनाई जानी चाहिए। गणेशजी की मूर्ति में सूंड बाई ओर मुड़ी होनी चाहिए। घर या आफिस में स्थायी रूप से गणेश स्थापना करना चाह रहे हैं तो सोने-चांदी, स्फटिक या अन्य पवित्र धातु या रत्न से बनी गणेश मूर्ति ला सकते हैं। गणेश प्रतिमा पूर्ण होनी चाहिए। इसमें गणेशजी के हाथों में अंकुश, पाश, लड्डू हो और हाथ वरमुद्रा में आशीवार्द देते हुए हो। कंधे पर नाग रूप में जनेऊ और वाहन के रूप में मूषक होना चाहिए।
गणेश चतुर्थी 2022 तारीख, शुभ मुहूर्त : गणेश चतुर्थी इस वर्ष 31 अगस्त को मनाई जाएगी। हिंदू धर्म में बुधवार के दिन को गणपति को स‍मर्पित माना गया है। इस साल गणेश चतुर्थी 31 अगस्‍त 2022, बुधवार को है। यानी कि 10 दिवसीय गणेशोत्‍सव पर्व बुधवार से शुरू होगा। जिसे बेहद शुभ माना जा रहा है। 
गणपति स्‍थापना का शुभ मुहूर्त :भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 30 अगस्त की दोपहर से शुरू हो रही है और 31 अगस्त को दोपहर 03:23 बजे समाप्‍त हो रही है। गणपति की मूर्ति की स्थापना का शुभ मुहूर्त 31 अगस्‍त दोपहर करीब साढ़े 3 बजे तक है।
गणेश चतुर्थी का महत्व 
गणेश उत्सव हिंदू कैलेंडर के अनुसार भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से शुरू होता है। और चतुर्दशी को समाप्त होता है। यह 10 दिनों का उत्सव है। गणेश के शरीर के विभिन्न अंगों का अलग महत्व है जिसमें सिर-आत्मान, शरीर- माया, हाथी का सिर- ज्ञान, ट्रंक-ओम का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार गणेश चतुर्थी को गणेश जी के जन्मोत्सव के रूप में मनाते हैं। महर्षि वेदव्यास जी ने महाभारत की रचना के लिए गणेश जी का आह्वान किया था और उनसे महाभारत को लिपिबद्ध करने की प्रार्थना की। कहते हैं गणेश चतुर्थी के दिन ही व्यास जी ने श्लोक बोलना और गणपति जी ने महाभारत को लिपिबद्ध करना शुरू किया था। 10 दिन तक बिना रूके गणपति ने लेखन कार्य किया।  इस दौरान गणेश जी पर धूल मिट्‌टी की परत जम गई। 10 दिन बाद यानी की अनंत चतुर्दशी पर बप्पा ने सरस्वती नदी में कर खुद को स्वच्छ किया। तब से ही हर साल 10 दिन तक गणेश उत्सव मनाया जाता है।
गणेश पूजा विधि
शास्त्रों के अनुसार भगवान गणेश की पूजा सभी देवी-देवताओं में सबसे पहले की जाती है। भगवान गणेश प्रथम पूज्य देवता हैं। भगवान गणेशी पूजा-उपासना करने पर सभी तरह के शुभ कार्यों में आने वाली रुकावटें फौरन ही दूर हो जाती है। प्रतिदिन गणेश पूजा से व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। 
आइए जानते हैं गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा किस तरीके से करें। 
सबसे पहले भगवान गणेश का आवहन करते हुए ऊं गं गणपतये नम: मंत्र का उच्चारण करते हुए चौकी पर रखी गणेश प्रतिमा के ऊपर जल छिड़के। भगवान गणेश की पूजा में इस्तेमाल होने वाली सभी सामग्रियों को बारी बारी से उन्हें अर्पित करें। भगवान गणेश की पूजा सामग्रियों में खास चीजें होती हैं ये चीजें- हल्दी, चावल, चंदन, गुलाल,सिंदूर,मौली, दूर्वा,जनेऊ, मिठाई,मोदक, फल,माला और फूल। इसके बाद भगवान गणेश का साथ भगवान शिव और माता पार्वती की भी पूजा करें। पूजा में धूप-दीप करते हुए सभी की आरती करें। आरती के बाद 21 लड्डओं का भोग लगाएं जिसमें से 5 लड्डू भगवान गणेश की मूर्ति के पास रखें और बाकी को ब्राह्राणों और आम जन को प्रसाद के रूप में वितरित कर दें। अंत में ब्राह्राणों को भोजन कराएं और उन्हें दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद लें।गणेश मंत्र 
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। 
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

अर्थ- घुमावदार सूंड वाले,विशालकाय शरीर,करोड़ों सूर्य के समान कीर्ति और तेज वाले, मेरे भगवान गणेश हमेशा मेरे सारे कार्य बिना बाधा के पूरे करें। 

एकदन्तं महाकायं लम्बोदरगजाननम्ं। 
विघ्नशकरं देवं हेरम्बं प्रणमाम्यहम्॥

अर्थ- जिनके एक दांत और सुंदर मुख है, जो शरण में आए भक्तों की रक्षा और प्रणतजनों की पीड़ा को नाश करने वाले हैं, उन शुद्ध स्वरूप आप गणपित को कई बार प्रणाम है। 

गजाननाय पूर्णाय साङ्ख्यरूपमयाय ते । 
विदेहेन च सर्वत्र संस्थिताय नमो नमः ॥

अर्थ- हे गणेश्वर ! आप गज के समान मुख धारण करने वाले, पूर्ण परमात्मा और ज्ञानस्वरूप हैं । आप निराकार रूप से सर्वत्र विद्यमान हैं, आपको बारम्बार नमस्कार है ।
 गणेश चतुर्थी रस्म रिवाज: उत्सव के बाद गणेश की मूर्तियों को ‘विसर्जन’ के हिस्से के रूप में पानी में डुबोया जाता है। यह त्योहार ‘कैलाश पर्वत’ से अपनी मां देवी पार्वती के साथ भगवान गणेश के अवतरण का प्रतीक है। घरों में भगवान गणेश की छोटी-छोटी मूर्तियां स्थापित की जाती हैं और पूजा-अर्चना की जाती है, आरती की जाती है और प्रसाद बांटा जाता है।
गणेश मूर्ति विसर्जन तारीख:   गणपति स्थापना 31 अगस्‍त को होगी और 10 दिन बाद 9 सितंबर को भगवान गणेश विसर्जन। इसी दिन लोग ‘गणपति बप्‍पा मोरिया अगले बरस तू जल्‍दी आ’ के जयकारों के साथ गणेश विसर्जन करते हैं। इस दिन ही अनंत चतुदर्शी तिथि भी रहती है। गणेश विसर्जन के साथ ही 15 दिनों का पितृ पक्ष शुरू हो जाता है। 
रिपोर्ट अशोक झा

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