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असम में दो और अलकायदा के संदिग्ध आतंकी गिरफ्तार

असम में दो और अलकायदा के संदिग्ध आतंकी गिरफ्तार
– आतंकी संगठन भारत के कई हिस्सों को काटकर बनाना चाहता है ग्रेटर बांग्लादेश
-पूर्वोत्तर के राज्य, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड और ओडिशा के कुछ हिस्सों को बांग्लादेश मे मिलाकर ग्रेटर इस्लामिक बांग्लादेश बनाने की हो रही है साजिश

अशोक झा, सिलीगुड़ी असम में आतंकी माड्यूल का भंडाफोड़ होने के बाद यहां संदिग्ध आतंकियों की गिरफ्तारी का सिलसिला जारी है। अब यहां के बारपेटा जिले से दो संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया गया है। बारपेटा एनसी अमिताव सिन्हा ने बताया, दोनों संदिग्ध व्यक्तियों का लिंक अलकायदा भारतीय उपमहाद्वीप (एआईक्यूएस) और अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (एबीटी) से है।उन्होंने बताया, पुलिस ने बारपेटा के एक मदरसे में बेदखली अभियान भी चलाया, क्योंकि यह मदरसा अवैध रूप से सरकारी जमीन पर बनाया गया था। पुलिस अधिकारियों ने बताया, पकड़े गए दोनों संदिग्धों का लिंक इस मदरसे से भी है। पुलिस ने बताया, बारपेटा जिले से गिरफ्तार किए गए संदिग्ध आतंकियों की पहचान कर ली गई है। एक की पहचान अकबर अली तो दूसरे की अबुल कलाम आजाद के रूप में हुई है।10 दिनों में छह गिरफ्तारी:आतंकी लिंक मामले में पुलिस ने पिछले 10 दिनों में करीब छह लोगों की गिरफ्तारी की है। इससे पहले गोलपारा से चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। बीती 26 अगस्त को पुलिस ने गोलपारा के एक मदरसे से हफीजुर्रहमान मुफ्ती नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार किया था। इसके भी आतंकी संगठन से संबंध थे। यह व्यक्ति यहां के मदरसे में शिक्षक था पूर्वोत्तर के राज्य, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड और ओडिशा के कुछ हिस्सों को बांग्लादेश मे मिलाकर ग्रेटर इस्लामिक बांग्लादेश बनाने की हो रही है साजिश। बांग्लादेश के जिहादी आतंकियों ने भारत में घुसपैठ करने का नया तरीका तैयार कर लिया है। असम पुलिस के गिरफ्त में आए कुछ आतंकी और मुजाहिदीनों ने पूछताछ में अहम खुलासे किए हैं। असम (Assam) में कट्टरपंथी संगठन अंसार अल इस्लाम अल कायदा के लिए ‘स्लीपर सेल’ स्थापित करने की कोशिश कर रहा था और उन्हें देश के अन्य हिस्सों में बांटने की योजना बना रहा था, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की प्रारंभिक जांच से ये जानकारी सामने आई है। बता दें NIA ने स्लीपर सेल बनाने की कोशिश कर रहे मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। असम पुलिस द्वारा अंसार अल इस्लाम जिसे अंसारुल्ला बांग्ला टीम (एबीटी) के रूप में भी जाना जाता है। पांच सदस्यों की गिरफ्तारी के बाद, केंद्रीय एजेंसी ने हाल ही में जांच अपने हाथ में ली और यहां तक ​​कि बारपेटा 
और बोंगईगांव में 11 स्थानों पर छापेमारी की। वहीं बांग्लादेश स्थित अंसार अल इस्लाम भारतीय उप-महाद्वीप (AQIS) में अल कायदा के साथ करीब से जुड़ा हुआ है और फरवरी 2015 में बांग्लादेश में जन्मे अमेरिकी लेखक अविजीत रॉय की हत्या सहित ढाका में नास्तिक ब्लॉगर्स पर हमलों के लिए जाना जाता है। पिछले साल दिसंबर में, अमेरिकी विदेश विभाग ने अपने शीर्ष दो नेताओं– सैयद मोहम्मद जियाउल हक उर्फ ​​मेजर जिया, जो एबीटी के सैन्य विंग के प्रमुख हैं और संगठन के खुफिया विंग के एक प्रमुख सदस्य अकरम हुसैन अबीर पर 5 मिलियन का इनाम घोषित किया था।
10 दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया

जांच से परिचित एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अंसार अल इस्लाम ने सितंबर 2019 में बांग्लादेश के नारायणगंज निवासी सैफुल इस्लाम को यहां नेटवर्क बनाने के लिए भारत भेजा था। सैफुल इस्लाम को चार अन्य लोगों खैरुल इस्लाम, बादशाह सुलेमान खान, नौशाद अली और तैमूर रहमान खान (बारपेटा के सभी निवासी) के साथ मार्च के पहले सप्ताह में गिरफ्तार किया गया था। संगठन के छह और सदस्यों, सभी भारतीय नागरिकों को शुक्रवार को असम पुलिस ने पकड़ा और उन्हें जल्द ही एनआईए को सौंप दिया जाएगा। उन्हें शनिवार को अदालत में पेश किया गया और उन्हें 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। छह लोगों को विशिष्ट इनपुट के आधार पर शुक्रवार को बारपेटा के विभिन्न हिस्सों से गिरफ्तार किया गया था। वे सभी एबीटी से संबद्ध हैं, जिसके बदले में एक्यूआईएस के साथ संबंध हैं। प्रवक्ता ने कहा कि सैफुल अवैध रूप से भारत में दाखिल हुआ था और ढकलियापारा मस्जिद में एक अरबी शिक्षक के रूप में काम कर रहा था। बताया कि आतंकी बांग्लादेश से असम के रास्ते भारत में घुसने के लिए मेडिकल और टूरिस्ट वीजा को हथियार बना रहे हैं। मित्र देश होने के कारण बांग्लादेश के नागरिकों के लिए ऐसे वीजा हासिल करना आसान होता है। आमतौर पर आतंकी पाकिस्तान और बांग्लादेश की सीमा से घुसपैठ कर भारत के विभिन्न सीमांत राज्यों तक पहुंचते हैं। इसके बाद देश विरोधी गतिविधियों को अंजाम देते हैं। बीते समय में जम्मू कश्मीर के अलावा पूर्वोत्तरीय राज्यों में भी सेना और सुरक्षा बलों की अचूक चौकसी के चलते आतंकियों के मंसूबों पर लगाम लगी है। इस बीच, निचले असम के कुछ जिलों में पुलिस ने कई आतंकियों की धरपकड़ कर सफलता हासिल की है। ये आतंकी बांग्लादेश स्थित और अल-कायदा से जुड़े जिहादी संगठनों के सदस्य निकले हैं। बंगाल के कई मदरसों में एक विशेष समुदाय के युवाओं को आतंकी प्रशिक्षण देने के साक्ष्य मिलने के साथ बेहद खतरनाक हथियार तैयार करने के साजो-सामान आदि मिले। यह भी पता चला कि भारत और बांग्लादेश में लोकतांत्रिक सरकार को उखाड़ कर दोनों देशों में शरिया कानून स्थापित करने के मकसद से भारत में आतंकी मॉड्यूल तैयार करने की जिम्मेदारी जेएमबी के शीर्ष नेताओं को सौंपी गई थी। यही नहीं बंगाल के कई सीमावर्ती जिलों को मिलाकर ग्रेटर बांग्लादेश बनाने की भी योजना पर जेएमबी काम कर रहा था। इस काम के लिए बांग्लादेश से लगे बंगाल के सीमावर्ती जिलों को सुरक्षा के लिहाज से मुफीद माना गया था। जेएमबी मॉड्यूल तैयार करने के लिए उन युवाओं को टारगेट पर रखा गया था जो घुसपैठ के जरिए बांग्लादेश से आकर बंगाल में रह रहे थे। युवाओं को बरगलाकर जिहाद का वास्ता देकर संगठन में शामिल करने के लिए मदरसों का इस्तेमाल किया गया। बंगाल के अलग- अलग जिलों में मॉड्यूल तैयार करने की जिम्मेदारी जेएमबी के शीर्ष नेताओं को सौंपी गई थी। आतंकी संगठन बांग्‍लादेश के राजनीतिक हालातों का फायदा उठाने की कोशिश में हैं। ऐसे में समस्‍या और बढ़ेगी राजनीतिक हालातों ने बांग्‍लादेश में मौजूद आतंकी संगठनों को और मजबूत बना दिया है। इस क्षेत्र में अल कायदा के बारे में भी बांग्‍लादेश को बताया जाएगा। अल कायदा बांग्‍लादेश के आतंकियों की मदद से एक अलग खलीफा देश की स्‍थापना करना चाहता है। रोहिंग्‍या मुसलमान अपना नेटवर्क मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं। बांग्‍लादेश में मौजूद आतंकी कैंपों की जानकारी भारत डॉजियर के जरिए देगा।चिंटगांव में मौजूद कैंपों में लोगों को ट्रेनिंग दी जाती है। कैंपों से उन्‍हें भारत के पश्चिम बंगाल, मेघालय और असम में भेज दिया जाता है। सीमा पर भारत के साथ बांग्‍लादेश को मजबूती से सहयोग देना होगा ताकि घुसपैठ पर लगाई जा सके। आर्थिक सामाजिक और राजनीतिक स्थितियों का आतंकी पूरी फायदा उठा रहे हैं। भारत और बांग्‍लादेश के बीच इन आतंकियों पर लगाम लगाने के लिए साझा प्रयासों की जरूरत। साथ ही सीमा पर मौजूद सुरक्षा बल आज के समय की जरूरत है और यह किसी भी दुर्घटना को रोक सकते हैं। आतंकियों से हुई पूछताक्ष में पता चला है कि वह एक आतंकी स्‍टेट की दिशा में काफी तेजी से काम कर रहे हैं।पाक में होगा हेडक्‍वार्टर इस डॉजियर पर अगर यकीन करें तो जेएमबी के कुछ ऑपरेटिव्‍स अल कायदा के सदस्‍यों के साथ संपर्क में हैं। जेएमबी और अलकायदा के इन सदस्‍यों के बीच पाकिस्‍तान में इस उप महाद्वीप में अपनी शाखा का हेडक्‍वार्टर स्‍थापित करने की कोशिशों में लगे हुए हैं। 

गांव में संदिग्ध आए तो करें सूचित

पिछले दिनों असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने अपील की थी कि हमने कुछ एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर) बनाए हैं कि अगर आपके गांव में कोई इमाम आता है और आप उसे नहीं जानते हैं तो तुरंत पुलिस स्टेशन को सूचित करें, वे सत्यापित करेंगे, उसके बाद ही वे रुक सकते हैं। असम का हमारा मुस्लिम समुदाय इस काम में हमारी मदद कर रहा है। रिपोर्ट अशोक झा

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