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 क्या किसी षड्यंत्र के तहत भारत के खिलाफ युद्ध की तैयारी में लगा हुआ है सलमान अजहरी ?

 क्या किसी षड्यंत्र के तहत भारत के खिलाफ युद्ध की तैयारी में लगा हुआ है सलमान अजहरी ?
-सलमान अजहरी द्वारा किए गए जिनमे गजवा ए हिंद का खुलकर करता है समर्थन
-मुल्ला ज़लाली और खादिम रजवी को पाकिस्तान की सेना और आईएसआई ने इस काम में लगाया
अशोक झा, सिलीगुड़ी:जहां एक ओर देश की राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर गृह मंत्रालय इस बात को लेकर चिंतित है कि किस प्रकार अंतरराष्ट्रीय सीमावर्ती क्षेत्र में एक साजिश के तहत जनसंख्या में वृद्धि की जा रही है वहीं दूसरी ओर सलमान अजहरी के जहरीले भाषण युवाओं का ब्रेनवाश कर रहा है। नामूसे रिसालत के बहाने लोगों की भीड़ इकट्ठा करके फिर उनकी भावनाओं को भड़काना,लोगों को एक खास सियासी दल के विरोध के आड़ में भारत के विरोध पर आमादा करना और तो और उन्हीं सभाओं में भावनाओं को उकेर कर लोगों से मरने मारने को आमादा करना और कसमें दिलाकर लोगों को अपने मिशन के लिए तैयार करना, कि जिसका उद्देश्य भारत को अस्थिर करना है,ऐसे कार्यक्रम करने का आखिर सलमान अजहरी का उद्देश्य क्या है?स्पष्ट है कि किसी षड्यंत्र के तहत भारत के खिलाफ युद्ध की तैयारी में लगा हुआ है सलमान अजहरी। जिस पर समय रहते अगर लगाम नहीं कसी गई तो निश्चित रूप से देश को गंभीर खतरे का सामना करना पड़ सकता है। यह हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि सलमान रजवी उर्फ सलमान अजहरी वो नाम है जिसे सुनते ही जहन में पाकिस्तान के कुख्यात भारत विरोधी मुल्ला अशरफ आसिफ़ ज़लाली और खादिम हुसैन रजवी का चेहरा आ जाता है। ये दोनों वो कुख्यात चेहरे हैं,जिन्होंने पाकिस्तान से नामूस ए रिसालत की शुरुवात की। दरअसल नामूस ए रिसालत का मुद्दा तो सिर्फ एक बहाना है,उसके पीछे पाकिस्तान सहित वहाबी राजनीतिक विचारधारा के सारे कट्टरपंथियों का विश्व भर में इस्लामी साम्राज्यवाद को स्थापित करने का नज़रिया काम करता है चूंकि पैगंबरे इस्लाम हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैह वसल्लम की तौहीन का मुद्दा एक भावनात्मक मुद्दा है,जिसके द्वारा एक बड़ा जनसमूह इकट्ठा किया जा सकता है। 1971 में भारत के हाथों बुरी तरह मात खा जाने और धर्म के आधार पर बने पाकिस्तान के भाषा के आधार पर विभाजित होने के बाद उसके द्वारा भारत के खिलाफ़ अपनी रणनीति को बदला गया,और एक सोची समझी रणनीति के तहत गजवा ए हिंद के मुद्दे को आगे बढ़ाया गया है। गजवा ए हिंद के प्रमुख प्रचारक रहे इसरार क़ासमी के मरने के बाद मुल्ला ज़लाली और खादिम रजवी को पाकिस्तान की सेना और आईएसआई ने इस काम में लगाया।  
 इन दोनो ने बखूबी अंजाम दिया और 2014 से अब तक नामूस ए रिसालत की आड़ में लोगों के जज़्बात को भड़का कर एक बड़ा समूह अपने पाले में खड़ा कर लिया है। विशेषज्ञ इस तथ्य से अवश्य सहमत होंगे कि जिस तेज़ी के साथ इन दोनों पाकिस्तानी मुल्लाओं ने अपनी पकड़ पाकिस्तान की आवाम के साथ साथ भारत के एक बड़े वर्ग में बनाई है, उतनी पकड़ तो पाकिस्तान का कोई भी बड़े से बड़ा मुल्ला आज तक नहीं बना पाया।आइए अब सीधे सीधे असल मुद्दे पर आते हैं,और मुद्दा है केरल की वंशानुगत पृष्ठभूमि रखने वाला कर्नाटक का मूल निवासी सलमान रजवी उर्फ सलमान अजहरी जिसने उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के मुबारकपुर के जामे अल अशरफिया से शिक्षा प्राप्त की। उसके बाद उसने बरेली के रज़ा मदरसे में पढ़ाई की। फिर मिस्र के जामे अल अज़हर से शिक्षा प्राप्त की। इन दिनों कर्नाटक के हुबली से धर्म की आड़ में कट्टरपंथी कार्यक्रम को बढ़ाना शुरू किया। कोवलपेट की जामा मस्जिद के इमाम के रूप में सलमान अजहरी ने स्थानीय मुल्ला मौलवियों और अपने समर्थकों के साथ मिलकर एक धार्मिक समूह बनाया।  विवादास्पद मुद्दों के सहारे लोगों की भावनाओं को भड़काकर अपने साथ मिलाना शुरू किया। पाकिस्तान के भारत विरोधी आतंकी मुल्ला ज़लाली और खादिम रजवी को अपना आदर्श मानते है। सलमान रजवी ने ठीक उस समय जब मुमताज कादरी प्रकरण पाकिस्तान में उरूज पर था नामूसे रिसालत के मुद्दे को परवान चढ़ाने का कार्य किया। यहां तक कि कमलेश तिवारी प्रकरण में अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में कथित तौर से मुस्लिम समुदाय को भड़काकर सलमान अजहरी द्वारा हिंसा भड़काई गई,जिसके चलते कर्नाटक राज्य में उसके खिलाफ आधा दर्जन से अधिक मुकदमे गंभीर अपराधिक धाराओं में दर्ज हुए। गौर तलब बात है कि जिस तरह से पाकिस्तान के आतंकियों द्वारा अपनी प्लानिंग रची जा रही थी कमोबेश उसी तर्ज पर सलमान अजहरी द्वारा भी भारत में गतिविधियां की जा रही थीं।जैसे ही नामूसे रिसालत के साथ गजवा ए हिंद आंदोलन को पाकिस्तान के इन दोनो मुल्लाओं के द्वारा गति दी गई,सलमान अजहरी भी उसी दिशा में कार्य करने लगा। सलमान अजहरी के वक्तव्यों को जिस किसी ने भी सुना होगा वो आसानी से अंदाजा लगा सकता है, कि घोर आपत्ति वाले बयान आखिर इतने सालों तक लोगों से छुपे कैसे रह गए।सलमान अजहरी ने विगत वर्षों में जितने भी वक्तव्य जारी किए उनमें शायद ही कोई ऐसा वक्तव्य रहा हो जिसमे नामूसे रिसालत के नाम पर लोगों को भड़काया न गया हो ।अक्सर ऐसे कार्यक्रम सलमान अजहरी द्वारा किए गए जिनमे गजवा ए हिंद का खुलकर समर्थन किया गया है। बहुत ही अधिक दिलचस्प बात है कि सलमान रजवी उर्फ सलमान अजहरी के अलावा भारत का कोई भी इस्लामी विद्वान गजवा ए हिंद के कांसेप्ट को स्वीकार ही नहीं करता,फिर सलमान अजहरी द्वारा लगातार इसी मुद्दे पर सारे देश में लोगों को प्रोत्साहित करने का उद्देश्य आखिर क्या है? रिपोर्ट अशोक झा

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