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अनुब्रत मंडल  की बेटी सुकन्‍या ने कहा कि मानसिक स्थिति ठीक नही

अनुब्रत मंडल  की बेटी सुकन्‍या ने कहा कि मानसिक स्थिति ठीक नहीं, सीबीआई से नहीं कर सकते बातचीत
– सीबीआई अनुब्रत मंडल की सारी संपत्ति का राज जानने की कर रही कोशिश
अशोक झा, सिलीगुड़ी:  सीबीआई के सूत्रों के मुताबिक, सुकन्‍या ने कहा कि वह अभी बात करने की मानसिक स्थिति में नहीं है क्‍योंकि एक तरफ जहां उसके पिता हिरासत में हैं, वहीं एक साल पहले उसने अपनी मां को खोया है। वह इन सारी चीजों से परेशान है। सीबीआई की टीम ने लगभग दस मिनट तक सुकन्‍या को मनाने की काफी कोशिश की और जांच में सहयोग करने के लिए कहा, लेकिन बात नहीं बनी। सीबीआई को शक है कि ये दोनों कंपनियां मवेशियों की अवैध तस्‍करी से जुटाए गए काले धन को छिपाने के लिए बनाई गई अवैध पशु व्यापार की आय को अलग-अलग रास्ते पर ले जाने के लिए मुखौटा कंपनियां हैं।सूत्रों ने कहा कि सीबीआई के द्वारा एएनएम एग्रोचेम फूड्स प्राइवेट लिमिटेड और नीर डेवलपर प्राइवेट लिमिटेड दो कंपनियों का पता लगाए जाने के बाद सुकन्‍या मंडल से पूछताछ करना अब जरूरी हो गया क्‍योंकि इन कंपनियों के डायरेक्‍टर्स में से वह एक है। दूसरे डायरेक्‍टर विद्युत गायेन है।सवाल यह है कि राज्‍य सरकार द्वारा संचालित एक स्‍कूल में प्राइमरी टीचर सुकन्‍या के नाम इतनी संपत्ति कैसे हो सकती है। सीबीआई के सूत्रों ने कहा है कि इन दो कंपनियों के अलावा बैंक में सुकन्‍या के कई निजी और पिता सहित परिवार के अन्‍य सदस्‍यों के साथ ज्‍वॉइंट अकाउंट हैं। इन पर भी सीबीआइ की नजर है। सीबीआई ने बुधवार को बोलपुर में अनुब्रत मंडल के चार्टर्ड अकाउंटेंट मनीष कोठारी के साथ-साथ एक सरकारी बैक की स्थानीय शाखा के दो कर्मचारियों से भी पूछताछ की, जहां उनकी और सुकन्‍या दोनों के खाते हैं।मालूम हो कि पश्चिम बंगाल में गाय तस्करी मामला 2020 में पहली बार सामने आया था। इस मामले में टीएमसी नेता अनुब्रत मंडल गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उन्‍हें 20 अगस्त तक सीबीआइ की हिरासत में भेज दिया गया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के अधिकारियों को कुछ महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं, जो पशु तस्करी घोटाले में तृणमूल कांग्रेस के कद्दावर नेता अनुब्रत मंडल को सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के कमांडेंट सतीश कुमार से जोड़ते हैं।सीबीआई सूत्रों के अनुसार, पहली कड़ी, पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में भारत-बांग्लादेश सीमा पर बीएसएफ की 36वीं बटालियन के कमांडेंट के रूप में कुमार की पोस्टिंग का समय है, जिसे पारंपरिक रूप से तस्करी में सीमा पार मवेशी तस्करी का केंद्र माना जाता है। कुमार को 2015 और 2017 के बीच वहां तैनात किया गया था, ठीक उसी समय अवधि जब अनुब्रत मंडल की संपत्ति की मात्रा अधिकतम आसमान छू गई थी। सूत्रों के अनुसार, दूसरी कड़ी यह है कि सतीश कुमार के बेटे भुबन भास्कर, हॉक इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड में एक लेखाकार के रूप में कार्यरत थे, जो मंडल के करीबी सहयोगी, एनामुल होक द्वारा प्रेरित एक मुखौटा कंपनी है, जो वर्तमान में केंद्रीय एजेंसी की हिरासत में है। होक को सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों ने दोनों को हिरासत में ले लिया था, जो मवेशी तस्करी रैकेट में मनी ट्रेल एंगल में समानांतर जांच कर रहे हैं।  भास्कर को कंपनी के रिकॉर्ड के अनुसार 40,000 रुपये मासिक वेतन का भुगतान किया गया था और वह दिसंबर 2017 तक वहां कार्यरत थे, जो फिर से मुर्शिदाबाद जिले में बटालियन कमांडेंट के रूप में उनके पिता की पोस्टिंग के समय से मेल खाता है। सूत्रों ने कहा कि सीबीआई और ईडी दोनों के अधिकारी इन कंपनियों के निदेशकों के साथ-साथ अन्य कंपनियों के निदेशकों का विवरण हासिल करने के लिए रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (आरओसी) के अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में हैं। रिपोर्ट अशोक झा

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