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राष्ट्रपति राष्ट्र के नाम संदेश:: कहा,हम भारतीयों ने संदेह जताने वाले लोगों को गलत साबित किया

राष्ट्रपति राष्ट्र के नाम संदेश::
कहा,हम भारतीयों ने संदेह जताने वाले लोगों को गलत साबित किया
-इस मिट्टी में न केवल लोकतंत्र की जड़ें बढ़ीं है, बल्कि, समृद्ध भी हुईं
अशोक झा, सिलीगुड़ी: भारत की आजादी के 75 साल पूरे होने पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित किया। राष्ट्रपति मुर्मू ने देश को संबोधित करते हुए कहा कि हम भारतीयों ने संदेह जताने वाले लोगों को गलत साबित किया है। इस मिट्टी में न केवल लोकतंत्र की जड़ें बढ़ीं है, बल्कि, समृद्ध भी हुईं। लोकतंत्र की वास्तविक क्षमता का पता लगाने में दुनिया की मदद करने का श्रेय भारत को दिया जा सकता है। बतौर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का देश के नाम यह पहला संबोधन है।
मुर्मू ने कहा कि देश का विकास अधिक समावेशी होता जा रहा है और क्षेत्रीय असमानताएं भी कम हो रही हैं। दुनिया ने हाल के वर्षों में नए भारत को विकसित होते देखा है, विशेषकर कोविड-19 महामारी के प्रकोप के बाद। अधिकांश लोकतान्त्रिक देशों में वोट देने का अधिकार प्राप्त करने के लिए महिलाओं को लंबे समय तक संघर्ष करना पड़ा था। लेकिन हमारे गणतंत्र की शुरुआत से ही भारत ने सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार को अपनाया।

आजादी का महोत्सव भारत की जनता को समर्पित

राष्ट्रपति ने कहा, 14 अगस्त के दिन को विभाजन-विभीषिका स्मृति-दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। इस स्मृति दिवस को मनाने का उद्देश्य सामाजिक सद्भाव, मानव सशक्तीकरण और एकता को बढ़ावा देना है। आज़ादी का अमृत महोत्सव मार्च 2021 में दांडी यात्रा की स्मृति को फिर से जीवंत रूप देकर शुरू हुआ। उस युगांतरकारी आंदोलन ने हमारे संघर्ष को विश्व-पटल पर स्थापित किया। उसे सम्मान देकर हमारे इस महोत्सव की शुरुआत की गई। यह महोत्सव भारत की जनता को समर्पित है।

भारत में आज जीवन-मूल्यों को दी जा रही प्रमुखता

भारत में आज संवेदनशीलता व करुणा के जीवन-मूल्यों को प्रमुखता दी जा रही है। इन जीवन-मूल्यों का मुख्य उद्देश्य हमारे वंचित, जरूरतमंद तथा समाज के हाशिये पर रहने वाले लोगों के कल्याण हेतु कार्य करना है। आज जब हमारे पर्यावरण के सम्मुख नई-नई चुनौतियां आ रही हैं तब हमें भारत की सुंदरता से जुड़ी हर चीज का दृढ़तापूर्वक संरक्षण करना चाहिए। जल, मिट्टी और जैविक विविधता का संरक्षण हमारी भावी पीढ़ियों के प्रति हमारा कर्तव्य है। रिपोर्ट अशोक झा

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