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रक्षाबंधन 12 अगस्त को, 11 को पूर्णिमा के साथ भद्रा का योग

रक्षाबंधन 12 अगस्त को, 11 को पूर्णिमा के साथ भद्रा का योग 
– शुभ तिथि में रक्षा सूत्र बांधकर भाई की लंबी उम्र की करें कामना
अशोक झा, सिलीगुड़ी: हिंदू धर्म में रक्षाबंधन  का पर्व भाई-बहन के प्यार का प्रतीक माना गया है। यह दिन भाई-बहनों के लिए बेहद खास होता है। इस दिन बहनें भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती हैं और उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं।  रक्षाबंधन का पर्व आने में दो ही दिन बाकी हैं, लेकिन लोग इसकी डेट को लेकर काफी कंफ्यूज हैं। आचार्य पंडित यशोधर झा का कहना है कि कुछ लोगों का मानना है कि राखी 11 अगस्त को बांधी जाएगी। वहीं, कुछ का मानना है कि 11 अगस्त 2022 को भद्रा काल होने के कारण राखी का त्योहार 12 अगस्त 2022 को शुक्रवार के दिन मनाया जाएगा। रक्षाबंधन पर भद्राकाल में राखी नहीं बांधनी चाहिए। इसके पीछे एक पौराणिक कथा भी है। लंकापति रावण की बहन सुपर्णखा ने भद्राकाल में ही उनकी कलाई पर राखी बांधी थी और एक वर्ष के अंदर उसका विनाश हो गया था। भद्रा शनिदेव की बहन थी। भद्रा को ब्रह्मा जी से यह श्राप मिला था कि जो भी भद्रा में शुभ कर्म या मांगलिक कार्य करेगा, उसका परिणाम अशुभ ही होगा। शास्त्रों में यही कहा गया है कि जो उदया तिथि है उसी का मान दिन भर रहेगा। इसलिए रक्षाबंधन 12 अगस्त 2022 शुक्रवार को पूरा दिन मनाया जाएगा।अगर तिथियों का अवलोकन किया जाए तो एकादशी, त्रयोदशी और पूर्णमासी आदि तिथि पर भद्रा रहती ही है। उन्होंने बताया कि भद्रा के विषय में एक बात है जिसके बारे में लोगों के पास जानकारी नहीं है कि भद्रा का वर्णन वास्तु शास्त्र में किया गया है। कुंभ, मीन, कर्क और सिंह में चंद्रमा हो तो भद्रा का वास मृत्यु लोक यानी पृथ्वी पर माना जाता है. इसके अलावा मेष, वृष, मिथुन ,वृश्चिक में चंद्रमा होने पर भद्रा का वास स्वर्ग लोक में होता है। वहीं, कन्या, तुला और धनु में चंद्रमा होने पर भद्रा का वास पाताल लोक में माना जाता है। ऐसे में भद्रा अगर पाताल लोक में हो या स्वर्ग लोक में यह काफी शुभ फलदायी माना जाता है। ऐसे में 11 अगस्त 2022 को भद्रा पाताल लोक में है जिसके चलते आप बिना किसी दिक्कत के 11 अगस्त को रक्षा बंधन का त्योहार मना सकते हैं और सुबह 10 बजकर 37 मिनट के बाद भाइयों को रक्षा सूत्र बांध सकते हैं। भद्रा के पाताल लोक में होने के कारण वह आपको किसी भी तरह का कष्ट नहीं देगी।
प्रतिपदा तिथि में नहीं बांधी जाती राखी

कहते है कि भद्रा अगर धरती लोक पर भी होती है तब भी उसके मुख और पूंछ का समय देखा जाता है। भद्रा के मुख के समय पर राखी नहीं बांधी जाती लेकिन आप पूंछ के समय पर राखी बांध सकते हैं, यह शुभ फलदायी माना जाता है और इससे कोई दिक्कत भी नहीं होती। 12 तारीख को सुबह 7 बजे के आसपास पूर्णिमा तिथि समाप्त होकर प्रतिपदा तिथि लग जाएगी। प्रतिपदा तिथि में राखी नहीं बांधी जाती है। ऐसे में इस साल रक्षा बंधन का पर्व 11 अगस्त 2022 गुरुवार के दिन ही मनाया जाएगा। भद्रा पाताल लोक में होने की वजह से शुभ फलदायी साबित होगी।

रक्षाबंधन पर भद्रा काल का समय 

रक्षा बंधन भद्रा अन्त समय – रात 08 बजकर 51 मिनट पर
रक्षा बंधन भद्रा पूँछ – शाम 05 बजकर 17 मिनट से 06 बजकर 18 मिनट पर 
रक्षा बंधन भद्रा मुख – शाम 06 बजकर 18 मिनट से लेकर 08 बजे तक

11 अगस्त को इतने बजे के बाद बांधें राखी 

पूर्णिमा तिथि 11 अगस्त को सुबह 10 बजकर 37 मिनट से शुरू होकर 12 अगस्त को सुबह 7 बजकर 5 मिनट पर समाप्त होगी. ऐसे में पूर्णिमा तिथि 11 को पूरा दिन है. ऐसे में आप 11 अगस्त को सुबह 10 बजकर 37 मिनट के बाद राखी का त्योहार मना सकते हैं। माना जाता है कि सूर्पनखा ने रावण को भद्रा में रक्षा सूत्र बांधा था इसलिए 1 वर्ष के भीतर ही रावण का नाश हो गया था. ऐसे में भद्रा काल में राखी बांधना वर्जित माना जाता है लेकिन राम चरित्र मानस से लेकर वाल्मीकि रामायण में भगवान राम की बहन की ओर से राम जी को राखी बांधने का उदाहरण कहीं नहीं दिया गया है। 

रक्षा बंधन से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। मान्यता है कि इस खास दिन भगवान को राखी बांधने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। आइए जानते हैं। आचार्य पंडित यशोधर झा का कहना है भाई से पहले किस भगवान को राखी बांधना शुभ होता है।
गणेश जी 
गणेश जी हिंदू धर्म में सर्वप्रथम पूजे जाने वाले देवता हैं। गणेश जी को लाल रंग बहुत प्रिय है, इसलिए माना जाता है कि रक्षाबंधन पर गणेश जी को लाल रंग की राखी बांधने से आपकी सारी परेशानियां दूर हो जाती हैं। इससे घर में सुख-समृद्धि आती है।
भगवान शिव
सावन का महीना भगवान शिव को बहुत प्रिय होता है। रक्षाबंधन का पर्व सावन के आखिरी दिन आता है।ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव को राखी बांधने से आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।हनुमान जी
रक्षाबंधन के दिन हनुमानजी को लाल रंग की राखी बांधनी चाहिए। ऐसा माना जाता है कि राखी बांधने से कुंडली में मंगल का प्रभाव कम होता है और बल-बुद्धि की प्राप्ति होती है।
श्रीकृष्ण
भगवान कृष्ण ने द्रौपदी को अपनी बहन माना और रक्षा करने का वचन दिया। जब द्रौपदी का चीरहरण कर लिया गया था, तब भगवान कृष्ण ने द्रौपदी की रक्षा की थी। इस दिन भगवान कृष्ण को राखी बांधने से वे हर स्थिति में आपकी रक्षा करते हैं।रिपोर्ट अशोक झा

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