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भाजपा से तोडा नाता, आरजेडी से किया गठबंधन

भाजपा से तोडा नाता, आरजेडी से किया गठबंधन
– मुख्यमंत्री रहेंगे नीतीश कुमार, गृह मंत्रालय तेजस्वी के हाथ
अशोक झा, सिलीगुड़ी: बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने राज्यपाल फागू चौहान को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। सीएम नीतीश कुमार ने राजभवन जाकर अपना इस्तीफा गर्वनर को सौंपा। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी से अपना गठबंधन तोड़ दिया है और महागठबंधन के साथ सरकार बनाने की घोषणा की है।मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर से महागठबंधन के साथ मिलकर सरकार बनाने की तैयारी में जुटे हैं। बताया जा रहा है कि नीतीश कुमार कुल 160 विधायकों के समर्थन पत्र के साथ राज्‍यपाल को सौंप दिया है । बुधवार को ही शपथ ग्रहण समारोह होगा।  राजद के 79, जेडीयू के 45,  लेफ्ट पार्टी के 19, कांग्रेस के 16 और 1 निर्दलीय विधायकों के समर्थन का दावा किया जा रहा है। दूसरी तरफ, बदलते सियासी समीकरण के बीच बिहार बीजेपी की कोर कमेटी की बैठक पटना में होने वाली है। बैठक में हिस्‍सा लेने के लिए राधामोहन सिंह शाम को पटना पहुंच रहे हैं। इससे पहले भाजपा के वरिष्‍ठ नेता और मंत्री डिप्‍टी सीएम तारकिशोर प्रसाद के आवास पर जुटे थे। वहीं, महागठबंधन के घटक दलों के विधायकों और जेडीयू के सांसदों व विधायकों की अलग-अलग बैठक हुई।
बीजेपी  और जेडीयू  का गठबंधन 17 साल पुराना कहा जाता है, हालांकि एक बार इसमें सेंध लग चुकी है लेकिन जेडीयू ने फिर से इसमें वापसी कर ली थी। राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपने के बाद नीतीश कुमार ने कहा कि पार्टी के सभी सांसदों और विधायकों में आम सहमति बनी कि हमें एनडीए (NDA) छोड़ देना चाहिए। उन्होंने कहा कि बीजेपी के साथ काम करना मुश्किल हो रहा था। राज्यपाल को इस्तीफा सौंपने के बाद नीतीश कुमार आरजेडी नेता तेजस्वी यादव से मिलने के लिए निकल गए। इससे पहले नीतीश कुमार ने जदयू (JDU) के सांसदों, विधायकों और वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की थी। इस बैठक में नीतीश कुमार ने कहा कि बीजेपी (BJP) ने हमेशा अपमानित किया और जेडीयू को खत्म करने की साजिश रची गई है। सीएम से कहा कि 2020 से ही उनका वर्तमान गठबंधन उन्हें कमजोर करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने चिराग पासवान का नाम लिए बिना कहा कि वह एक ऐसा उदाहरण थे। सीएम ने कहा कि अगर वे अभी सतर्क नहीं हुए तो ये पार्टी के लिए अच्छा नहीं होगा।
जदयू के सभी नेताओं ने किया नीतीश कुमार का समर्थन

जदयू की बैठक में पार्टी के सभी विधायकों और सांसदों ने सीएम नीतीश कुमार के फैसले का समर्थन किया और कहा कि वे उनके साथ हैं। उन्होंने कहा कि वह जो भी फैसला करेंगे वे हमेशा उनके साथ रहेंगे। बैठक के बाद जदयू के राष्ट्रीय संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने ट्वीट किया, “नए रूप में नए गठबंधन के नेतृत्व के लिए नीतीश कुमार को बधाई। 

महागठबंधन भी नीतीश कुमार के साथ

जदयू के अलावा आज महागठबंधन की बैठक भी हुई है। इस बैठक में राजद विधायक, एमएलसी और राज्यसभा सांसदों ने पार्टी नेता तेजस्वी यादव को फैसला लेने के लिए अधिकृत किया और कहा कि वे उनके साथ हैं। कांग्रेस और वाम दलों के विधायक पहले ही कह चुके हैं कि वे तेजस्वी यादव के साथ हैं। राजद सूत्रों का कहना है कि पूर्व सीएम लालू प्रसाद यादव भी हर हलचल पर करीब से नजर रख रहे हैं, लेकिन सब कुछ तेजस्वी यादव कर रहे हैं. आरजेडी नीतीश कुमार को समर्थन दे सकती है।

बीजेपी नेताओं ने भी की बैठक

वहीं बीजेपी (BJP) ने भी उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद के आवास पर अपने शीर्ष नेताओं की बैठक की है। बिहार सरकार में मंत्री और बीजेपी नेता शाहनवाज हुसैन (Shahnawaz Hussain) ने कहा कि हम अपनी पार्टी को मजबूत करते हैं, हम किसी अन्य पार्टी को कमजोर नहीं करते  मैं पटना जा रहा हूं। इस मामले पर पार्टी नेतृत्व आधिकारिक बयान देगा। हमने बिहार (Bihar) के लोगों के लिए ईमानदारी से काम किया है। 

कैसे आईअस्तित्व में JDU

2003 से पहले तक जनता दल यूनाइटेड (JDU) केवल जनता दल (Janta Dal) हुआ करता था. 1999 के लोकसभा चुनाव में जनता दल के एक गुट ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को समर्थन दे दिया, जिसके बाद दल दो हिस्सों में बंट गया। इसके पहले हिस्से ने एचडी देवेगौड़ा नेतृत्व में जनता दल सेक्युलर (JDS) पार्टी बना ली और दूसरे धड़े की कमान शरद यादव ने संभाली। 30 अक्टूबर 2003 को शरद यादव के धड़े, लोकशक्ति पार्टी और समता पार्टी का विलय हो गया और इस प्रकार नई पार्टी जनता दल यूनाइटेड का गठन हुआ। हालांकि, चुनाव आयोग ने समता पार्टी का विलय रद्द कर दिया। 

जब पहली बार बीजेपी के समर्थन से CM बने नीतीश कुमार

बिहार के 2005 के विधानसभा चुनाव से पहले जेडीयू एनडीए में शामिल हो चुकी थी। 2005 का विधानसभा चुनाव बीजेपी और जेडीयू ने पहली बार साथ में लड़ा और आरजेडी के नेतृत्व वाली यूपीए की सरकार को पटखनी दे दी। लेकिन इस वर्ष विधानसभा का चुनाव दो बार हुआ। पहले चुनाव में किसी के पास 122 का स्पष्ट बहुमत न होने कारण राष्ट्रपति शासन लगा और फिर अक्टूबर-नवंबर में दोबारा चुनाव हुए तो बीजेपी-जेडीयू ने सरकार बना ली। इस प्रकार बीजेपी से जब टूटा नीतीश का रिश्ता 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी और जेडीयू के संबंध अपने-अपने राजनीतिक हितों के चलते तल्ख हो गए. बीजेपी ने 2014 के चुनाव बीजेपी ने नरेंद्र मोदी को चुनाव प्रकार कमेटी का प्रमुख बना दिया. जेडीयू ने इसके विरोध में एनडीए के साथ गठबंधन खत्म कर दिया. लोकसभा चुनाव में नीतीश कुमार ने कम्युनिस्ट पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा लेकिन असफलता मिली. चुनाव नतीजों के बाद बिहार की सत्ता बड़ा उलटफेर सामने आया. नीतीश कुमार ने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया था और जीतनराम मांझी सीएम बन गए थे. बीजेपी ने इस सरकार से बहुमत सिद्ध करने के लिए कहा तो आरजेडी ने जेडीयू को समर्थन दे दिया था और सरकार गिरने से बच गई।26 जुलाई 2017 को नीतीश कुमार ने 20 महीने पहले ही बने महागठबंधन को खत्म करने का एलान कर पद से इस्तीफा दे दिया और अगले ही दिन जेडीयू ने एनडीए में वापसी कर ली और बीजेपी के सहयोग से नीतीश ने फिर से सीएम पद की शपथ ली। सदन में एनडीए ने बहुमत सिद्ध कर दिया। 2019 के लोकसभा चुनाव में बिहार में एनडीए ने जबरदस्त जीत हासिल की। 40 में 39 सीटें एनडीए ने जीत लीं। बीजेपी 17, एलजेपी 6 और जेडीयू 16 सीटें जीती थी। 2020 के विधानसभा चुनाव में भी जेडीयू ने एनडीए के साथ चुनाव लड़ा और सरकार बना ली लेकिन अभी डेढ़ साल के कार्यकाल में कई बार दोनों के बीच में अनबन होने की बात सियासी गलियारों में गूंजरी रही है।

बिहार के राजनीति के मौजूदा हालात

पिछले काफी समय से सीएम नीतीश कुमार मोदी सरकार की बैठकों और कार्यक्रमों से दूरी बनाए हैं। वह नीति आयोग की बैठक में भी शामिल नहीं हुए. इसके उलट उनके कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से फोन पर संपर्क साधने की खबर आई। वहीं, आरसीपी सिंह के अचानक जेडीयू से इस्तीफे और जेडीयू द्वारा पार्टी सांसदों-विधायकों की बैठक बुलाए जाने पर बिहार की सत्ता में बड़े उलटफेर की कयासबाजी ने जोर पकड़ लिया है। आजेडी के साथ जेडीयू के जाने की अटकलबाजी का बाजार गर्म है। बीजेपी की तरफ से फिलहाल मामले को लेकर कुछ नहीं कहा गया है। वह वेट एंड वॉच की स्थिति में है। रिपोर्ट अशोक झा

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