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भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाने का सपना  रहा हैं पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया यानी पीएफआई

भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाने का सपना  रहा हैं पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया यानी पीएफआई
-महिला संगठन बनाने की तैयारी में PFI,मिशन-2047 को, सर-ए-अंजाम तक पहुंचाने की निगहबानी अपनी वुमन ब्रिग्रेड के हवाले
-संगठन में बिहार, यूपी, केरल, पश्चिम बंगाल से जुड़ती सीमाओं पर स्थित को किया है मजबूत
अशोक झा, सिलीगुड़ी:
हिंदुस्तानी एजेंसियों द्वारा नेस्तनाबूद किया जा चुका प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन ‘सिमी’ की रंगीन फोटो स्टेट कॉपी माना जा रहा पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया यानी पीएफआई काबू आने को राजी नहीं है। ज्यों-ज्यों हिंदुस्तानी एजेंसिया इसका इलाज कर रही हैं त्यों-त्यों यह देश के लिए ‘नासूर’ सा बनता जा रहा है। एक ओर जहां दिन-रात हिंदुस्तानी एजेंसियां इसकी जड़ें खोदने में लगी हैं। वहीं दूसरी ओर इस सबसे ब-खबर होने के बावजूद, पीएफआई के कथित रहनुमा या कहिए कर्ता-धर्ता और सपोर्टर और भी ज्यादा खतरनाक होते जा रहे हैं। फुलवारी शरीफ से लीड लेकर आगे बढ़ने के दौरान काफी कुछ नई और चौंकाने वाली बातें सामने आ रही हैं। गिरफ्तार मुलजिमों के बयान की पुष्टि कर लेने से पहले मगर कुछ बोलना सही नहीं होगा।” खुफिया सूत्रों से हासिल जानकारी के मुताबिक तो, “पीएफआई अब अपने संगठन में बिहार, यूपी, केरल, पश्चिम बंगाल से जुड़ती सीमाओं पर स्थित गांवों की ओर रुख कर रही है।  इसके पीछे मकसद हो सकता है कि इन इलाकों में (सीमांत क्षेत्र) स्थित गांवों में गरीबी-बेरोजगारी काफी है। लिहाजा ऐसे में इसी मजबूरी का फायदा उठाकर संभव है कि पीएफआई वुमन बिग्रेड के लिए यहीं से अपनी महिला सदस्यों को संगठन में जोड़ने की कवायद शुरु कर दे। यहां बताना जरूरी है कि केरल और पश्चिम बंगाल में तो इस बात की खुफिया रिपोर्ट्स पहले भी आती रही हैं कि, पीएफआई ने इन राज्यों के कई इलाकों में अपनी महिला बिग्रेड बना भी ली है। इस महिला विंग की दो शाखाएं बताई जाती हैं. पहली शाखा कैंपस और दूसरी शाखा को सामान्य शाखा की श्रेणी में रखा गया है। कैंपस शाखा का काम है कि वो देश के शिक्षण संस्थानों में पहुंचकर अपने यानी संगठन के मतलब की महिला-लड़कियों को बरगलाएं।
NIA को मिली अहम जानकारियां
अपने जन्म के समय सिमी भी खुद को एक धर्म विशेष का रहनुमा उसकी हिफाजत करने वाला बताता था। बाद में जब देश में सिमी ने अपनी जड़ें जमाकर ताबड़तोड़ बम धमाकों को अंजाम देना शुरू किया, तो देश की जांच और खुफिया एजेंसियों की सिमी को लेकर सब गलतफहमियां दूर हो गईं। सिमी के नापाक इरादों को भांपते ही हमने (देश की पुलिस, जांच और खुफिया एजेंसियों) एकजुट होकर, उसकी जड़ें इस कदर खोदीं कि, आज उसका कहीं नाम-ओ-निशान नहीं मिलता है।  देश के खुफिया विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक, “फुलवारी शरीफ मामले की तह तक पहुंचने के लिए जबसे एनआईए पहुंची है, तब से काफी कुछ अलग व महत्वपूर्ण लीड्स (जानकारियां) पीएफआई के बारे में मिल रही है।  अभी तक जितनी एफआईआर इस संगठन से जुड़े लोगों पर सिर्फ बिहार में दर्ज हो चुकी हैं। इतने संदिग्धों के खिलाफ एक साथ केस (मुकदमे) बीते कई साल में तो दर्ज नहीं हुए। जानकारी के मुताबिक. हालांकि अभी-अभी इसकी पुष्टि करना बाकी है। वरना पता चला है कि, पीएफआई आने वाले वक्त के लिए अपनी वुमन बिग्रेड भी बनाने की तैयारियों में जुटा है। इन तथ्यों की सभी एजेंसियां अपने स्तर से जानकारी इकट्ठी कर रही हैं.” खुफिया विभाग के इन वरिष्ठ अधिकारी से टीवी9 को हासिल जानकारियों की पुष्टि दबी जुबान बिहार पुलिस के एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी भी करते हैं।
महिलाएं PFI का आसानी से कर सकती हैं प्रचार

वहीं सामान्य श्रेणी शाखा पीएफआई के लिए गांव-गांव पहुंचकर, उन भोली-भाली महिलाओं को घेरने का काम करती है, जिन्हें दीन-दुनिया के बारे में कुछ नहीं पता। जिनका शिक्षा-रोजगार और शहर से दूर-दूर तक का कोई वास्ता ही नहीं होता। अब सवाल यह पैदा होता है कि आखिर गांवों की जिन महिलाओं का बाहरी दीन-दुनिया से कोई वास्ता ही नहीं तो फिर वे महिलाएं या लड़कियां पीएफआई जैसे खुराफाती संगठन के भला किस काम की है? इस सवाल के जवाब में खुफिया विभाग के अधिकारी ने कहा, “दरअसल गांव की महिलाएं भले ही खुद कुछ ना कर सकें। मगर वे पीएफआई का प्रचार-प्रसार तो गांव-गांव करने के लिए मजबूत माध्यम हैं ही। ग्रामीण महिलाएं अपने युवा होते बच्चों में तो संगठन की गतिविधियों का प्रचार-प्रसार कर ही सकती हैं। बात जब बच्चों-पुरुषों तक पहुंचेगी तो वह फिर गांव से बाहर और शहर तक भी पहुंच जाएगी। अंदर का सच यह है कि एक कोने में जाकर यह जब तक घेरा जाता है, तब तक इसके गुर्गे कहीं किसी वीरान-खंडहर में जाकर अपना दूसरा गांव जाकर आबाद कर ले रहे हैं। आइए जानते हैं कि आखिर ऐसे खतरनाक प्रतिबंधित संगठन ने क्या वास्तव में अपने मिशन-2047 को, सर-ए-अंजाम तक पहुंचाने की निगहबानी अपनी वुमन ब्रिग्रेड के हवाले कर दी है? हम उसी पीएफआई की बात कर रहे हैं, जिसने हिंदुस्तानी हुकूमत को नीचा दिखाने के कथित षडयंत्र के तहत, भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाने जैसे बेतुके ख्वाब देखना शुरू किए हैं।

खुफिया जांच एजेंसियों के लिए सिरदर्द बना PFI
यहां उसी बदनाम पीएफआई की बात हो रही है जिसके पे-रोल पर पले बताए जा रहे हैं, तमाम हमारी ही एजेंसियों के पूर्व अफसर-कर्मचारी। वही बे-सिर-पैर का संगठन पीएफआई जो देश के अमन-चैन में तो सेंधमारी की कुत्सित सोच या तमन्ना रखता है। ऐसा करने पर मगर तबाह कर डाले जाने के भय से पीएफआई, अपने और अपनों के खिलाफ कहीं कोई सबूत ना छोड़ने का ख्याल हर षडयंत्र को बुनने से पहले रखता है। हिंदुस्तानी खुफिया और जांच एजेंसियों के लिए सिरदर्द बना वही पीएफआई हाल-फिलहाल जिसका मास्टरमाइंड निकला है, झारखंड पुलिस का रिटायर्ड दारोगा मोहम्मद जलालुद्दीन है। वरिष्ठ पत्रकार अशोक झा ने 1974 बैच के आईपीएस और उत्तर प्रदेश पुलिस के रिटायर्ड पुलिस महानिदेशक विक्रम सिंह और बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे से बात की। दोनों ने बताया, “एक दारोगा जलालुद्दीन का नाम सामने ले आने से हमारी एजेंसियां खुशफहमी ना पाल बैठें? देश के दबंग पूर्व आईपीएस विक्रम सिंह के मुताबिक, “पीएफआई के भीतर झांककर देखिए तो, सामने आ रहे रिटायर्ड दारोगा मोहम्मद जलालुद्दीन की तो कोई बहुत ज्यादा औकात नहीं है। तलाशिए पीएफआई के उन सपोर्टर्स को जिनके भीतर 100-100 जलालुद्दीन से भी बड़े अफसरान घुसे बैठे हैं। जब तक पीएफआई में जलालद्दुीन से लोगों और उनके शरणदाताओं को नहीं दबोचा जाएगा। तब तक पीएफआई को तबाह करना मुश्किल है।

देश के तमाम हिस्सों में फैल रहा पीएफआई

इनका एक मिशन हम (भारतीय एजेंसियां) खत्म करेंगीं। तब तक इसके गुर्गे चार और मिशन की तैयारी पूरी करके उन पर अमल करने के इरादे बनाए बैठे होंगे। इस संगठन का सफाया तभी संभव है जब हमारी एजेंसिया ठोस रणनीति बनाकर, सिर्फ और सिर्फ इसी संगठन के पीछे हाथ धोकर पडेंगीं। वरना तो हमारी एजेंसियां इन्हें पटना-फुलवारी में जब तक काबू करेंगी, तब तक इनकी दूसरी पौध या बेल देश के बाकी तमाम हिस्सों में पौंड़ चुकी होगी। हिंदुस्तानी खुफिया एजेंसियों की मानें तो फुलवारी शरीफ (बिहार) में इसी रिटायर्ड दारोगा जलालुद्दीन के अड्डे पर पीएफआई के ‘मिशन 2047’ चर्चाएं हुआ करती थीं। पीएफआई के भाड़े के गुंडों की ट्रेनिंग के दौरान यह रिटायर्ड दारोगा मोहम्मद जलालुद्दीन खुद मौजूद रहता था। ताकि हिंदुस्तानी हुकूमत के खिलाफ किसी भी षडयंत्र को अंजाम देने के दौरान, कहीं कोई ऐसी चूक ना हो जाए जिससे ऑपरेशन फिर संगठन प्रभावित हो। बिहार पुलिस की मानें तो गिरफ्तार मोहम्मद जलालुद्दीन ने कबूला तो यहां तक है कि उसके साथ कोई अतहर परवेज भी जुड़ा है। अब एजेंसियां अतहर परवेज की तलाश में धूल फांकती फिर रही हैं। आतंक का चेहरा बदला है चाल नहीं,”देश में सिमी से खतरनाक आतंकवादी संगठन के खात्मे के बाद उसी के अंदर से निकला, यह (पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया) एक ऐसा खतरनाक संगठन है, जिसका चेहरा बदला है चाल नहीं। सिमी की मानें तो ऐसी हम लोग हिला चुके हैं कि वह दुबारा जिंदगी में गर्दन उठाकर देखने के काबिल ही उसे नहीं छोड़ा है। सन 2008-2009 के वक्त में सिमी ने देश के कोने-कोने में सीरियल बम ब्लास्ट करके देश की एजेंसियों की नींद हराम कर रखी थी। उसके बाद हमने (हिंदुस्तानी एजेंसियों ने) ऐसा तोड़ निकाला कि, सन 2010 के बाद से अब तक कहीं भी सिमी का नाम-ओ-निशान बाकी नहीं देखने को मिला है। हां, इसकी आशंका जरुर है कि बेबस और बर्बाद कर डाले गए सिमी के कुछ कट्टर आतंकवादी किस्मत से बचकर, अब पीएफआई को संभाल रहे हों!” बात जब नेस्तनाबूद हो चुके सिमी और अब दौड़भाग में जुटे बदनाम“पीएफआई हो या फिर सिमी। यह ऐसे या वह खतरनाक संगठन हैं, जो समाज के लिए दीमक हैं। इन्हें फलने-फूलने का वक्त ज्यादा नहीं दिया जाना चाहिए। सिमी के जितने भी आतंकवादियों को गिरफ्तारी के बाद इंटेरोगेट किया गया, उसके मुताबिक तो अब पीएफआई को देखकर लगता है कि, यह भी उसी के नक्शे-कदम पर आगे बढ़ रहा है। रिपोर्ट अशोक झा

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