Khabar AajkalNewsPoliticsPopularState

पार्थ की रात कटी अस्पताल में,इस वक्त ममता सरकार बैकफुट पर

पार्थ चटर्जी की रात कटी अस्पताल में,इस वक्त ममता सरकार बैकफुट पर
-सबकी नजर इस पर है कि चटर्जी पर ममता क्या एक्शन लेती हैं? 
– पार्टी झाड़ रही इस पूरे प्रकरण से अपना पल्ला 
अशोक झा, सिलीगुड़ी: ममता बनर्जी के करीबी कहे जाने वाले पार्थ चटर्जी इस वक्त शिक्षक भर्ती घोटाले मामले में हिरासत में हैं। बीजेपी ममता सरकार पर इस मुद्दे पर हमलावर है। ऐसे में सबकी नजर इस पर है कि चटर्जी पर ममता क्या एक्शन लेती हैं? इस पर सबकी नजर है। इस वक्त ममता सरकार बैकफुट पर है और बीजेपी लगातार दबाव की राजनीति कर रही है। ऐसे में एक सवाल बार-बार उठ रहा है कि टीएमसी सुप्रीमो अपने खास सहयोगी पर क्या एक्शन लेती हैं? पार्थ टीएमसी के पुराने वफादार सिपहसालार हैं। खुद बंगाल की सीएम भी उन्हें ‘पार्थो दा’  कहती हैं और इसी से दोनों के रिश्ते की गहराई समझी जा सकती है। पश्चिम बंगाल  शिक्षक भर्ती घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय  ने राज्य के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी को गिरफ्तार किये जाने के बाद उनकी तबियत बिगड़ गई। पार्थ चटर्जी ने सीने में दर्द की शिकायत की जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें पूरी रात अस्पताल में बिताना पड़ा है। वहीं, अब उन्हें सोमवार कोर्ट के सामने पेश किया जाएगा। पार्थ के वकील सोमनाथ मुखर्जी  ने कोर्ट से कहा कि अभी उनकी तबियत ठीक नहीं है। ऐसे में अभी उन्हें समय देना चाहिए और उन्हें पर्याप्त
चिकित्सकीय सुविधाएं मिलनी चाहिए। 
सुख के सब साथी दुख में न कोई
ऐसे में तृणमूल कांग्रेस पार्थो चटर्जी की गिरफ्तारी से स्वयं को दूर कर लिया है। पार्टी नेताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर उन्हें घोटाले में शामिल होने का दोषी पाया जाता है, तो तृणमूल चटर्जी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने से नहीं हिचकेगी, जो वर्तमान में पार्टी के महासचिव हैं।प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी द्वारा चटर्जी से जुड़े नवीनतम घटनाक्रम पर पार्टी के रुख पर फैसला करने के लिए बुलाई गई एक आपात बैठक हुई थी। प्रेस मीट में राज्य की वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य, परिवहन मंत्री और कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम, बिजली मंत्री अरूप विश्वास और पार्टी प्रवक्ता कुणाल घोष मौजूद थे। उन्होंने कहा, “एक महिला के आवास से कुछ नकदी बरामद की गई है, जिसका तृणमूल कांग्रेस से कोई संबंध नहीं है। हम विपक्षी दलों द्वारा तृणमूल कांग्रेस को इस मुद्दे से जोड़ने के प्रयासों की निंदा करते हैं। इस सिलसिले में ईडी ने पार्थ चटर्जी को गिरफ्तार किया है। कुणाल घोष ने कहा, “मैं केवल इतना कह सकता हूं कि तृणमूल नेतृत्व को न्यायिक व्यवस्था पर पूरा भरोसा है। अगर जांच के अंत में पार्थ चटर्जी दोषी साबित होते हैं, तो तृणमूल उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने से नहीं हिचकेगी। 
कैसे अर्श से फर्श पर नजर आ रहे हैं ममता के करीबी पार्थ चटर्जी
दक्षिण कोलकाता के नकटला पड़ोस में पले-बढ़े एक मध्यम वर्ग के लड़के से लेकर तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और ममता बनर्जी कैबिनेट में मंत्री तक, पार्थ चटर्जी का पांच दशक का करियर दांव पर लग गया है। 69 वर्षीय पार्थ चटर्जी, वर्तमान में ममता बनर्जी सरकार में उद्योग और संसदीय मामलों के विभाग को संभाल रहे। वह वर्ष 2014 से 2021 तक शिक्षा मंत्री थे। उनके शिक्षा मंत्री रहने के दौरान शिक्षक भर्ती में कथित अनियमितताएं हुईं। पार्थ चटर्जी ने साठ के दशक के उत्तरार्ध में कांग्रेस की छात्र शाखा-छात्र परिषद के नेता के रूप में राजनीति में कदम रखा। तब वह कॉलेज में पढ़ाई कर रहे थे। वह तत्कालीन तेजतर्रार युवा नेताओं सुब्रत मुखर्जी और प्रिय रंजन दासमुंशी से प्रेरित थे।पार्थ चटर्जी ने साठ के दशक के उत्तरार्ध में कांग्रेस की छात्र शाखा-छात्र परिषद के नेता के रूप में राजनीति में कदम रखा। तब वह कॉलेज में पढ़ाई कर रहे थे। वह तत्कालीन तेजतर्रार युवा नेताओं सुब्रत मुखर्जी और प्रिय रंजन दासमुंशी से प्रेरित थे।सत्तर के दशक के मध्य में एक हाई-प्रोफाइल कारपोरेट नौकरी करने का फैसला करने के बाद उनका राजनीतिक करियर रुक गया। ममता बनर्जी के कांग्रेस से अलग होने और एक जनवरी 1998 को तृणमूल कांग्रेस का गठन करने के बाद चटर्जी ने सक्रिय राजनीति में उतरने का फैसला किया।
लगातार 5 बार बने विधायक
वह तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर वर्ष 2001 से लगातार पांच बार बेहाला पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए। चटर्जी का सियासी सफर वर्ष 2006 में तब शिखर पर पहुंचा, जब विधानसभा में वह तृणमूल कांग्रेस पार्टी के नेता बने और बाद में नेता प्रतिपक्ष बने। जब ममता बनर्जी ने सिंगूर और नंदीग्राम में कथित जबरन भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर बंगाल की सड़कों पर शक्तिशाली वाम मोर्चा शासन के खिलाफ लड़ाई लड़ी, तो चटर्जी विधानसभा में विपक्ष की आवाज बन गए।चटर्जी उस समय सबसे आगे थे जब उनकी पार्टी ने भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर विधानसभा में तत्कालीन मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य को घेरा। वर्ष 2007 में बनर्जी ने उन्हें तृणमूल कांग्रेस का महासचिव नियुक्त किया। चार साल बाद पार्टी के सत्ता में आने के बाद उन्हें उद्योग और संसदीय मामलों का प्रभार दिया गया। हालांकि, वर्ष 2014 में एक कैबिनेट फेरबदल में, उन्हें उद्योग विभाग से हटाकर शिक्षा विभाग दिया गया।
माने जाते मिलनसार नेता
वर्ष 2021 में पार्टी लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटी तो उन्हें उद्योग और संसदीय मामलों का विभाग दिया गया। उन्हें राजनीतिक हलकों में एक मिलनसार नेता के रूप में जाना जाता है। पार्थ चटर्जी का नाम एक पोंजी योजना में भी आया था, जिसकी जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) कर रही थी। हालांकि, उन्होंने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज कर दिया।ऐसे शुरू हुआ पार्थ चटर्जी का पतन
पार्थ चटर्जी का पतन 2016 से शुरू हुआ जब उन्हें शिक्षा मंत्री बनाया गया था। चटर्जी 2019 में एक विवाद में फंस गए जब यह बात फैली कि कई नौकरी चाहने वालों ने रिश्वत देकर सरकारी स्कूलों में टीचरों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नौकरी पाई। स्कूल की नियुक्तियों की निगरानी के लिए पांच सदस्यीय सलाहकार पैनल का गठन किया गया।

घोटाले से अर्पिता मुखर्जी का भी दिख रहा है संबंध
वहीं इसी मामले में पार्थ चटर्जी की करीबी सहयोगी अर्पिता मुखर्जी  को बैंकशाल कोर्ट में पेश किया जाएगा जहां ईडी की ओर से हिरासत की मांग की जाएगी। बता दें, अर्पिता मुखर्जी के फ्लैट से ईडी को शुक्रवार 21 करोड़ रुपये नकद मिले थे। ईडी ने पहले पार्थ चटर्जी को गिरफ्तार किया था जिसके बाद अर्पिता को भी गिरफ्तार किया गया। वहीं अर्पिता के फ्लैट से कुछ विदेश मुद्रा और जेवरात भी बरामद हुए।
ऐसे उठा इस घोटाले से पर्दा:
एसएससी भर्ती घोटाले के सिलसिले में शनिवार को पश्चिम बंगाल के मंत्री पार्थ चटर्जी की गिरफ्तारी, 2014 में सामने आए एक मुद्दे में नवीनतम विकास है। हाल ही में इस भर्ती परीक्षा में बैठे उम्मीदवारों के लगभग 500 दिनों के निरंतर विरोध को भी देखा गया है, जिनका दावा है कि उन्हें संबंधित परीक्षाओं को पास करने के बावजूद नौकरी नहीं मिली है। प्राथमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) के अलावा ग्रुप सी और ग्रुप डी कर्मचारी वर्ग में भी स्कूली शिक्षकों की भर्ती में अनियमितता के आरोप लगे हैं। यह मामला 2014 की शिक्षक भर्ती परीक्षा से जुड़ा है, जब पश्चिम बंगाल में राज्य सरकार द्वारा संचालित स्कूलों में एसएलएसटी (State Level Selection Test) के माध्यम से शिक्षकों की भर्ती के लिए एक अधिसूचना प्रकाशित की गई थी और भर्ती प्रक्रिया 2016 में शुरू हुई । कम अंक प्राप्त करने वाले कई उम्मीदवारों ने मेरिट सूची में उच्च स्थान प्राप्त किया। हालांकि, भर्ती प्रक्रिया में विसंगतियों का आरोप लगाते हुए कलकत्ता उच्च न्यायालय में याचिकाओं की एक श्रृंखला दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि कम अंक प्राप्त करने वाले कई उम्मीदवारों ने मेरिट सूची में उच्च स्थान प्राप्त किया। आरोप थे कि कुछ आवेदकों का नाम मेरिट लिस्ट में भी नहीं था, फिर भी उन्हें नियुक्ति पत्र मिले।सेलेक्शन पैनल का कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद हुईं 500 के करीब नियुक्तिया। साल 2016 में, राज्य सरकार ने स्कूल सेवा आयोग (School Service Commission) को सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के लिए 13,000 ग्रुप-डी कर्मचारियों की भर्ती के लिए एक अधिसूचना जारी की। वर्ष 2019 में नियुक्तियां करने वाले पैनल का कार्यकाल समाप्त हो गया। हालांकि, कलकत्ता उच्च न्यायालय में याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि इसके बावजूद, एसएससी के माध्यम से पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा कम से कम 25 व्यक्तियों को नियुक्त किया गया था।शिक्षक पद पर ऐसे लोगों की नियुक्तियां हुई थीं, जो टीईटी 2014 में उत्तीर्ण नहीं थे
बाद में, याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि 500 ​​से अधिक ऐसी नियुक्तियां की गई थीं। इसी तरह, पश्चिम बंगाल प्राथमिक शिक्षा बोर्ड के खिलाफ कथित तौर पर ‘अवैध रूप से’ शिक्षकों की भर्ती के लिए मामले दर्ज कराए गए थे। कुछ याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि इस भर्ती प्रक्रिया के जरिए पश्चिम बंगाल के सरकारी स्कूलों में शिक्षक पद पर ऐसे लोगों की नियुक्तियां हुई थीं, जो टीईटी 2014 में उत्तीर्ण भी नहीं हुए थे। प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक के रूप में नौकरी पाने के लिए, एक उम्मीदवार को टीईटी उत्तीर्ण होना चाहिए। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि टीईटी-2014 में लगभग 23 लाख उम्मीदवार शामिल हुए और प्राथमिक शिक्षकों के रूप में लगभग 42,000 उम्मीदवारों की नियुक्ति के लिए एक पैनल प्रकाशित किया गया था। याचिकाकर्ताओं ने ऐसे पैनल के प्रकाशन की वैधता और शुद्धता के बारे में गंभीर संदेह व्यक्त किया था। इस शिक्षक भर्ती परीक्षा में व्यापक पैमाने पर अनियमितता को देखते हुए कोलकाता उच्च न्यायालय ने मामले में सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। इसी मामले में ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू की थी। रिपोर्ट अशोक झा

Related Articles

Back to top button