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ईडी की नजर में मंत्री पार्थ चटर्जी शिक्षक नियुक्ति घोटाले का मास्टर

ईडी की नजर में मंत्री पार्थ चटर्जी शिक्षक नियुक्ति घोटाले का मास्टर
– पर्याप्त सबूतों के आधार पर ईडी ने कसा शिकंजा
– अर्पिता और पार्थ चटर्जी के बीच लगातार होती थी बातचीत
अशोक झा, सिलीगुड़ी: पश्चिम बंगाल में वरिष्ठ टीएमसी नेता और ममता बनर्जी कैबिनेट के कद्दावर मंत्री पार्थ चटर्जी पर प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई का मामला सुर्खियों में बना हुआ है। इस हाई प्रोफाइल मामले में अब बड़ा खुलासा हुआ है। पार्थ चटर्जी की घोटाले में संलिप्तता को लेकर प्रवर्तन निदेशालय पहले से ही एक्टिव था। यह भी सामने आया है कि ईडी पार्थ चटर्जी की 14 दिन की रिमांड भी मांगना चाहता था। 
रिमांड कॉपी में क्या? घोटाले में पार्थ सीधे तौर से जुड़े थे, घर से SSC भर्ती से जुड़े दस्तावेज मिले। ग्रुप D स्टाफ भर्ती से जुड़े दस्तावेज मिले।अर्पिता मुखर्जी के नाम संपत्ति के दस्तावेज मिले। कई शेल कंपनियों के दस्तावेज मिले। अर्पिता के घर से मिला कैश घोटाले से आया
पार्थ और अर्पिता का सीधा संबंध:
पार्थ चटर्जी का इलाज SSKM अस्पताल में कराने वाले निचली अदालत के फैसले के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय ने कोलकाता हाईकोर्ट में अपील की है। ED की याचिका पर थोड़ी देर में सुनवाई हो सकती है। करोड़ों रुपयों का ढेर, एक के बाद एक हो रहा बड़ा उलटफेर। करीब एक दिन की पूछताछ के बाद ममता सरकार में मंत्री पार्थ चटर्जी ED के शिकंजे में आ गए तो अर्पिता मुखर्जी को भी ED ने गिरफ्तार कर लिया है।ED ने जांच शुरू की तो अर्पिता मुखर्जी के घर पर 21 करोड़ रुपये से ज्यादा कैश और करीब 78 लाख रुपये की ज्वैलरी बरामद हुई। लंबी पूछताछ के बाद ED ने दावा किया कि अर्पिता मुखर्जी का पार्थ चटर्जी से सीधा संबंध हैं। ईडी ने कोलकाता की स्पेशल कोर्ट में पार्थ चटर्जी की 14 दिन की रिमांड की मांग की थी। ईडी ने कोर्ट को बताया था कि उसने कोलकाता हाइकोर्ट के आदेश पर सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर को आधार बनाकर 24 जून 2022 को एक ECIR दर्ज की थी।
शिक्षक भर्ती में बड़ा घोटाला

कोलकाता में प्राइमरी टीचर्स की भर्ती में घोटाले को लेकर आरोपियों पर FIR दर्ज की गई थी। इस मामले में कोलकाता हाइकोर्ट ने गैरकानूनी तरीके से नॉन टीचिंग स्टाफ ग्रुप C और D, इसके साथ ही 9 से 12 तक के टीचिंग स्टॉफ की भर्ती के सीबीआई से जांच कराने के आदेश दिए थे. इन सभी भर्तियों को वेस्ट बंगाल सेंट्रल स्कूल सर्विस कमीशन और वेस्ट बंगाल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन कराते हैं।

सीबीआई ने पार्थ पर कसा शिकंजा

हाइकोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने पार्थ चटर्जी को जांच में शामिल होने के लिए बुलाया था। कोलकाता हाइकोर्ट ने अपने अलग-अलग आदेश में साफ किया है कि असिस्टेंट टीचर्स की पूरी भर्ती प्रक्रिया गैरकानूनी थी। ईडी को भी कई सारी शिकायतें मिल रही थीं। जिसमें आरोप लगाया जा रहा था कि तत्कालीन शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर सरकारी नौकरियों को बेचकर (जिसमे प्राइमरी टीचर्स और असिस्टेंट टीचर्स शामिल थे) काफी मोटा पैसा बनाया है। इन पैसों को अलग-अलग लोगों की कंपनियों के नाम पर खपाया गया है।

ऐसे सामने आया अर्पिता का नाम

जांच आगे बढ़ी तो पार्थ चटर्जी की करीबी अर्पिता मुखर्जी का नाम सामने आया, जिसने उनका पैसा ठिकाने लगाया था। ED ने पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी समेत अन्य लोगों के ठिकानों पर छापेमारी की। सर्च के दौरान पार्थ चटर्जी के घर से कई अचल सम्पति से जुड़े आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद हुए। ये संपत्तियां अर्पिता मुखर्जी या उसकी कंपनी के नाम पर थीं।

बरामद हुए चौंकाने वाले दस्तावेज

इसके अलावा ग्रुप D स्टाफ की नियुक्ति से जुड़े दस्तावेज भी पार्थ चटर्जी के घर से बरामद किये गए। जिनमें 2016 में हुई ग्रुप D की भर्ती के उम्मीदवार के एडमिट कार्ड, उसके फाइनल रिजल्ट की समरी, 48 अपर प्राइमरी टीचर्स के उम्मीदवारों की रोल नंबर समेत लिस्ट भी बरामद हुई। इससे यह स्पष्ट हो गया कि पार्थ चटर्जी ग्रुप D की भर्ती प्रक्रिया में पूरी तरह सक्रिय थे।

इस नंबर पर होती थी अर्पिता से सीक्रेट चैट

जांच के दौरान जब ED ने अर्पिता मुखर्जी के डायमंड सिटी साउथ के टावर 2 के फ्लैट में सर्च की तो वहां से करीब 21 करोड़ 20 लाख  कैश मिला। जो कि कक्षा 9 से 12 तक के असिस्टेंट टीचर्स की गैरकानूनी भर्ती के जरिये कमाया गया पैसा है। जांच के दौरान पता चला कि पार्थ चटर्जी अर्पिता मुखर्जी से लगातार इस (8910946***) नंबर के जरिये संपर्क में रहते थे। जांच के दौरान ED ने जब पार्थ चटर्जी का सामना आपत्तिजनक दस्तावेजों से कराया तो उन्होंने जांच में बिल्कुल भी सहयोग नहीं किया। अभी तक कि जांच में साफ हो गया है कि पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल रहे हैं।केंद्रीय एजेंसी के अधिकारियों द्वारा अर्पिता की पृष्ठभूमि की जांच से पता चला है कि पश्चिम बंगाल के वाणिज्य और उद्योग मंत्री और तृणमूल कांग्रेस के महासचिव पार्थ चटर्जी की विश्वासपात्र हैं और करीबी सहयोगी के रूप में काम कर रही हैं. अपनी वर्तमान स्थिति तक पहुंचने के लिए एक एक ओडिया अभिनेत्री के तौर पर शुरुआत करने वाली अर्पिता हमेशा शॉर्टकट तरीके अपनाती हैं।ईडी ने इस सिलसिले में पार्थ को भी गिरफ्तार किया है. ईडी के सूत्रों ने कहा कि, ज्यादा महत्वाकांक्षा के चलते अर्पिता ने अपनी विधवा मां मिनोती मुखर्जी को कोलकाता के उत्तरी बाहरी इलाके में बेलघरिया में अपने पैतृक फ्लैट में ही छोड़ दिया. मिनोती मुखर्जी ने यहां मीडिया को बताया कि जब से उनकी बेटी दक्षिण कोलकाता के पॉश डायमंड सिटी आवासीय परिसर में अपने फ्लैट में रहने लगी है, (जहां से नकदी और सोना जब्त किया गया था) तब से उनकी बेटी के साथ उनके संबंध बहुत खराब हो गए।मिनोती मुखर्जी ने मीडियाकर्मियों से कहा, “मीडिया की खबरों से मुझे पता चला कि उसके फ्लैट से भारी नकदी बरामद हुई है. मैंने उससे पहले भी कई बार पूछा कि वह क्या काम कर रही है. लेकिन मुझे कभी कोई निश्चित जवाब नहीं मिला. अगर मुझे ऐसी बातें पता होतीं तो, मैं उसकी शादी जरूर करवा देती। इस बीच, ईडी के सूत्रों ने बताया कि अर्पिता मुखर्जी के स्वर्गीय पिता केंद्र सरकार के कर्मचारी थे, जिनका निधन उनकी सेवानिवृत्ति से पहले हो गया था. उस समय अर्पिता को अनुकंपा के आधार पर नौकरी की पेशकश भी की गई थी. हालांकि, उसने उस नौकरी को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और दावा किया कि वह मॉडलिंग और अभिनय में अपना करियर बनाना चाहती है। यह पता चला है कि ओडिया फिल्मों में मॉडलिंग और अभिनय के अपने शुरुआती वर्षों के दौरान, वह अपनी मां के संपर्क में थी। हालांकि, लगभग छह साल पहले पार्थ चटर्जी के साथ एक रियल एस्टेट प्रमोटर द्वारा संपर्क में आने के बाद से अर्पिता की जिंदगी बदल गई। इसके तुरंत बाद उन्हें पार्थ चटर्जी के साथ कई सार्वजनिक कार्यक्रमों में देखा गया और यहां तक कि एक दुर्गा पूजा उद्घाटन कार्यक्रम में भी देखा गया, जहां पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी मौजूद थीं. इसके तुरंत बाद अर्पिता अपने डायमंड पार्क कॉम्प्लेक्स के पॉश आवास में रहने लगी  इस बीच रविवार सुबह, ईडी के अधिकारी केंद्रीय सशस्त्र बलों के जवानों के साथ, अर्पिता को मेडिकल चेक-अप के लिए कोलकाता के दक्षिणी बाहरी इलाके जोका में केंद्र सरकार द्वारा संचालित ईएसआई अस्पताल ले गए. वहां उसने मीडियाकर्मियों से बात की और कहा कि वह निर्दोष है. उन्होंने कहा, “मैं निर्दोष हूं. लेकिन मुझे कानून पर भरोसा है। 

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