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‘खबर आजकल’ की खबर पर लगी मुहर

‘खबर आजकल’ की खबर पर लगी मुहर
तृणमूल कांग्रेस के महासचिव व  उद्योग मंत्री पार्थ चटर्जी गिरफ्तार करीबी अर्पिता बनर्जी ईडी हिरासत में
– 25 घंटा के गहन पूछताछ के बाद किया गया गिरफ्तार
– अब तक 21 करोड़ 20 लाख नगदी तथा करोड़ों के फ्लैट और जेवरात बरामद
– पार्थ चटर्जी का छलका दर्द, कहा पार्टी नेत्री से बात करने की कोशिश की पर बात नहीं हो पाई
अशोक झा, सिलीगुड़ी: खबर आज कल सिलीगुड़ी में सबसे पहले इस खबर को प्रकाशित किया कि ईडी पूर्व शिक्षा मंत्री व वर्तमान में राज्य के उद्योग मंत्री व पार्टी के महासचिव पार्थ चटर्जी और उनके सहयोगी अर्पिता मुखर्जी को गिरफ्तार कर सकती है। आखिरकार वही हुआ।शिक्षक भर्ती घोटाले ने पश्चिम बंगाल (West Bengal) की राजनीति में भूचाल ला दिया है। ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) सरकार में मंत्री पार्थ चटर्जी (Partha Chatterjee) को शनिवार सुबह प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गिरफ्तार कर लिया है। चटर्जी को करीब 26 घंटे की पूछताछ के बाद अरेस्ट किया गया। ईडी ने उनकी एक करीबी अर्पिता मुखर्जी (Arpita Mukherjee) को भी हिरासत में लिया है जिनके घर से भारी रकम बरामद हुई है। पार्थ चटर्जी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी हैं और उन्हें राज्य के ताकतवर मंत्रियों में शामिल किया जाता है। गिरफ्तारी के बाद अस्पताल जाने के क्रम में पार्थ चटर्जी का दर्द झलक आया उन्होंने कहा कि वह कोशिश किए थे पार्टी नेत्री से बात करें पर बात नहीं हो पाई। जब घोटाला हुआ था, उस समय पार्थ चटर्जी शिक्षा मंत्री थे। वह साल 2014 से 2021 तक शिक्षा मंत्री थे। इस समय पार्थ चटर्जी के पास वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अलावा संसदीय कार्य विभाग का प्रभार भी है। सरकार के साथ-साथ पार्थ चटर्जी की संगठन में भी बड़ा पद है। इससे उनके कद का पता चलता है। चटर्जी पश्चिम बंगाल तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के महासचिव हैं। उन्होंने साल 2001 में अपने राजनैतिक करियर की शुरुआत की थी। वह TMC के टिकट पर बेहाला पश्चिम सीट से जीतकर विधानसभा पहुँचे थे।साल 2011 में TMC के बंगाल में सत्ता में आने से पहले वह साल 2006 से 2011 तक विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता थे। उस समय बंगाल में वामपंथी दल की सरकार थी और पार्थ चटर्जी दूसरी बार विधानसभा के लिए चुनकर आए थे।पार्थ चटर्जी का जन्म 6 अक्टूबर 1952 को पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा नरेंद्रपुर के रामकृष्ण मिशन स्कूल से प्राप्त की। आशुतोष कॉलेज से उन्होंने अर्थशास्त्र की पढ़ाई करने के बाद कलकत्ता विश्वविद्यालय से MBA किया। इसके बाद वर्षीय 70 पार्थ चटर्जी ने एंड्र्यू युले कंपनी में HR प्रोफेशनल के तौर पर नौकरी की। साल 2001 में बेहाला पश्चिम सीट राजनीतिक करियर शुरू करने के बाद पार्थ चटर्जी TMC की टिकट पर कोलकाता दक्षिण सीट से 2006, 2011, 2016 और 2021 में लगातार पाँच बार विधायक चुने गए।
वह कोलकाता के प्रसिद्ध और बड़े दुर्गा पूजा समितियों में से एक नकटला उदयन दुर्गा पूजा समिति के अध्यक्ष भी हैं। इस समिति के पोस्टर में उनकी करीबी अर्पिता मुखर्जी की तस्वीर सामने आ चुकी है।बता दें कि पर्थ चैटर्जी को गिरफ्तार करने के बाद मेडिकल के लिए ले जाया गया। सुबह के वक्त पार्थ चटर्जी ने स्वास्थ्य खराब होने की बात कही थी। इसके बाद दो डॉक्टरों की टीम भी मौके पर पहुँची थी। दरअसल, कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देश पर भर्ती घोटाले के आरोपित मंत्री पार्थ चटर्जी के घर पर अधिकारियों की टीम पहुँची थी।22 जुलाई को ED की टीम ने पार्थ चटर्जी की गरीबी अर्पिता मुखर्जी के घर पर छापेमारी की थी। इस दौरान उनके घर से 20 करोड़ रुपए नकद के साथ-साथ 20 कीमती मोबाइल फोन, सोना, विदेशी मुद्रा, जमीन के दस्तावेज बरामद बरामद हुए हैं। माना जा रहा है कि यह वही रकम है, जो शिक्षक भर्ती घोटाले में रिश्वत के रूप में ली गई थी। बता दें कि साल 2020 में शिक्षा मंत्री रहते हुए उन्होंने कहा था कि राज्यपाल जगदीप धनखड़ लगातार सरकार के खिलाफ बोलते हैं, इसलिए उन्हें कलकत्ता विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में नहीं भी बुलाया जा सकता है। उन्होंने कहा था कि विश्वविद्यालय एक स्वायत्त संस्था है और उसे अपना निर्णय लेने का अधिकार है।
जानते हैं क्या है यह घोटाला ? CBI और ED कर रही हैं जांच : केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) हाईकोर्ट के निर्देश पर पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग की सिफारिशों पर सरकार द्वारा प्रायोजित व सहायता प्राप्त स्कूलों में समूह ‘सी’ और ‘डी’ के कर्मचारियों व शिक्षकों की भर्ती में हुई कथित अनियमितताओं की जांच कर रहा है. वहीं, ईडी इस मामले से संबंधित कथित धनशोधन की तफ्तीश में जुटा है। क्या है मामला?राज्य के माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के तहत शिक्षण और गैर-शिक्षण पदों पर नियुक्तियों के लिए स्कूल सेवा आयोग ने 2016 में परीक्षा आयोजित की थी। इस परीक्षा के तहत 20 उम्मीदवारों का चयन होना था।परीक्षा के परिणाम नवंबर 2017 में आए – सिलीगुड़ी की बबीता सरकार का नाम टाप 20 उम्मीदवारों में शामिल था. बबीता 20वें नंबर पर थी। लेकिन आयोग ने यह सूची रद्द कर दी. बाद में दोबारा लिस्ट निकली उसमें बबीता का नाम वेटिंग लिस्ट में चला गया। नई लिस्ट में बबीता 21वे नंबर पर आ गई और पहले नंबर पर परेश अधिकारी जो उस वक्त विधायक थे (फिलहाल शिक्षा विभाग के राज्य मंत्री हैं), की बेटी अंकिता अधिकारी का नाम आ गया। इस नई लिस्ट आने के बाद बबीता सरकार ने कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाई कोर्ट ने आयोग से दोनों की नंबर शीट मांगी जिससे खुलासा हुआ कि 16 नंबर कम पाने के बावजूद मंत्री जी की बेटी का नाम टॉप पर आ गया और 21 नंबर पर बबिता सरकार आ गई। कलकत्ता हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि अंकिता अधिकारी को नौकरी से हटाया जाए और उनको जितना वेतन मिली है वो वसूला जाए. वेतन वसूल कर पैसा बबिता सरकार को दिया जाए और उसे नौकरी पर रखा जाए। आदालत ने एक जांच आयोग बैठा दिया. अदालत ने पहले इस कथित घोटाले की जांच के लिए न्यायमूर्ति (रिटायर्ड) रंजीत कुमार बाग की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था।समिति ने अपनी रिपोर्ट में घोटाले में शामिल तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की सिफारिश की थी। रिपोर्ट अशोक झा

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