Khabar AajkalNewsPopular

उत्तर बंगाल में भी छुपी है कई अर्पिता और मोनाली

उत्तर बंगाल में भी छुपी है कई अर्पिता और मोनाली
– कोलकाता में छापामारी के बाद रातो-रात नगदी को पहुंचाया करीबियों के पास
अशोक झा, सिलीगुड़ी: पूर्वोत्तर का प्रवेश द्वार उत्तर बंगाल को शनिवार दिन भर हर जगह एक ही चर्चा सरेआम है कि उत्तर बंगाल में छुपे कई अर्पिता और मोहाली को ईडी और सीबीआई कब गिरफ्तार करेगी। चर्चा उच्च कार्यालय, रेलवे स्टेशन, बस पड़ाव से लेकर चाय और पान की दुकान तक की जा रही थी। कुछ जगहों से तो यह भी चर्चा सामने आई है कि कोलकाता में ईडी के छापामारी के बाद उत्तर बंगाल के कई नेता और अधिकारियों के पास रखे कैश को रातो रात अपने भरोसेमंद कुछ नर्सिंग होम, बिल्डर और कुछ बड़े व्यवसाई के पास भेज दिया है। इस बात को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता क्योंकि उत्तर बंगाल में एनजीपी से धुपगुरी तक पहले अवैध तेल का धंधा, बड़े पैमाने पर लकड़ी की तस्करी, मवेशी तस्करी, गोल्ड तस्करी, जीएसटी की हेराफेरी सिंडिकेट, शिक्षा माफिया सिंडिकेट स्वास्थ्य माफिया सिंडिकेट, भूमि माफियाओं का सिंडिकेट, सिंगिंग बार, पब बार, अवैध बिल्डिंग सिंडिकेट, मदद तस्करों का सिंडिकेट, शराब माफिया सिंडिकेट, मार्केट सिंडिकेट, अवैध खनन माफिया सिंडिकेट, बीएलआरओ सिंडिकेट, एफसीआई से अवैध वसूली सिंडिकेट, जाली नोट, हवाला कारोबार, लॉटरी माफिया, सट्टा माफिया समेत अवैध हथियारों के सिंडिकेट से भी बड़े पैमाने पर पैसों की वसूली होती है। यह शिक्षक नियुक्ति घोटाला के तर्ज पर से दूरसे  तक पहुंचता है। इस समाचार को पढ़ने के साथ जरा दिमाग पर जोर डालेंगे पाएंगे कि पार्थो चटर्जी की तरह यहां भी कई अफसर और नेताओं के आसपास अर्पिता और मोनालिसा जैसे कई खूबसूरत लड़कियां दिखाई दी जाएगी। हद
यह है कि ऐसी ही खूबसूरत लड़कियों के माध्यम से ज्यादातर लेन देन को संरक्षित किया जाता है। मजे की बात है कि इसके बारे में सब जानकर भी अंजान बने रहते हैं क्योंकि उन्हें अपना मतलब निकालने की पड़ी होती है। चर्चा यह है कि ऐसी खूबसूरत बालाओ के नाम पर उत्तर बंगाल के विभिन्न शहरों में इस प्रकार के सफेदपोश नेता और अधिकारियों ने कई प्रॉपर्टी खरीदी है। इस प्रकार के सिंडिकेट से जुड़े बड़े कारोबारियों तो घर बैठे मोटी रकम मिलती रहती है जिसे वह अपने धंधे में बिना ब्याज का खटाते हैं और ऐसे कारोबारी अधिकारियों के प्रिय भक्त बने रहते हैं। 34 साल के वामपंथी शासन के बाद जब से ममता सरकार सत्ता में आई है विपक्ष एक ही बात की मांग कर रहा है 2011 के बाद जो भी नेता या अधिकारी है उनका 2011 के पहले और आज के संपत्ति का निष्पक्ष जांच करा ली जाए। अगर ऐसा हो जाता है उत्तर बंगाल समेत पूरे राज्य में सिंडिकेट राज और भ्रष्टाचार पर पूरी तरह अंकुश लग जाएगा? यह बात अलग है कि उसके बाद पार्टी के इस निर्णय  के साथ कौन कितने समय तक जुड़ा रहता है। रिपोर्ट अशोक झा

Related Articles

Back to top button