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ईडी ने राज्य सभा सांसद प्रफुल्ल पटेल की संपत्तियों को जब्त किया गया

ईडी ने राज्य सभा सांसद प्रफुल्ल पटेल की संपत्तियों को जब्त किया
– उन्होंने दाऊद इब्राहिम के सहयोगी गैंगस्टर इकबाल मिर्ची से प्रॉपर्टी का सौदा किया
अशोक झा, सिलीगुड़ी:  एनसीपी प्रमुख शरद पवार के करीबी राज्य सभा सांसद प्रफुल्ल पटेल की संपत्तियों को जब्त किया गया है। प्रफुल्ल पटेल की मुंबई के वर्ली इलाके में स्थित सीजे हाउस की प्रॉपर्टी जब्त करने की कार्रवाई ईडी द्वारा की गई है।
प्रफुल्ल पटेल पर आरोप है कि उन्होंने दाऊद इब्राहिम के सहयोगी गैंगस्टर इकबाल मिर्ची से प्रॉपर्टी का सौदा किया है। ईडी ने यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के तहत की है। ईडी ने संपत्ति सीज करने की यह कार्रवाई सीजे हाउस की चार मंजिलों पर की है। इससे पहले भी ईडी ने सीजे हाउस में इकबाल मिर्ची से जुड़ी दो मंजिलों को सीज किया था। प्रफुल्ल पटेल द्वारा इकबाल मिर्ची की पत्नी के साथ 2019 में पैसों का लेन-देन किया गया था। इस बारे में ईडी द्वारा प्रफुल्ल पटेल की जांच और पूछताछ की गई थी। कप्रफुल्ल पटेल के परिवार से जुड़ी मिलेनियम डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने इकबाल मेमन के परिवार से वर्ली की जमीन को लेकर सौदा किया था। यह जमीन वरली के नेहरु तारामंडल के पास है  यहां मिलेनियम डेवलपर्स ने 15 मंजिला इमारत खड़ी की। इसी इमारत का नाम सीजे हाउस है। इसी इमारत की चार मंजिलों पर ईडी द्वारा कार्रवाई की गई है।

प्रफुल्ल पटेल ने D कंपनी के इकबाल मिर्ची से डील पर यह दी सफाई
प्रफुल्ल पटेल के परिवार से संबंधित यह जमीन पहले इकबाल मिर्ची की पत्नी हजरा मेमन के नाम पर थी। लेकिन प्रफुल्ल पटेल ने 2019 में इकबाल मिर्ची से जमीन का सौदा करने के आरोप पर सफाई देते हुए कहा था कि उन्होंने या उनके परिवार के सदस्यों ने डी कंपनी के इकबाल मिर्ची से कोई डील नहीं की है। मेमन परिवार से यह जमीन 1990 में ही एम.के.मोहम्मद नाम के शख्स को बेच दी गई थी। और अगर इस जमीन का मेमन परिवार से संबंध था तो 2004 में इस जमीन की डील की गई थी। सारे कागजात जिलाधिकारी के सामने रखे गए थे। तभी प्रशासन को आगे आकर इस डील को रोक देना चाहिए था।प्रफुल्ल पटेल का कहना है कि उन्होंने या उनके परिवार ने गैरकानूनी तरीके से जमीन का सौदा नहीं किया है। कानून के सभी नियमों का पालन कर यह डील की गई है. इसलिए उन पर या उनके परिवार से संबंधित कंपनी पर लगे आरोप बेबुनियाद हैं और उनमें कोई तथ्य नहीं है। रिपोर्ट अशोक झा

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