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पीएफआई के निशाने पर सीमांचल के कई भाजपा नेता

पीएफआई के निशाने पर सीमांचल के कई भाजपा नेता
-देश के कई हिस्सों में इस्लामिक आतंकवादियों के हमले का जारी किया गया अलर्ट 
-केंद्रीय गृह मंत्रालय की सूचना के बाद सीमांचल के सभी  पुलिस मुख्यालय ने जिलों को अलर्ट किया 
अशोक झा, सिलीगुड़ी:  पीएफआई (पापुलर फ्रंट आफ इंडिया) की देश विरोधी गतिविधियों के बीच देश के कई हिस्सों में इस्लामिक आतंकवादियों के हमले का अलर्ट जारी किया गया है।
बिहार के कई भाजपा नेता आतंकियों के निशाने पर हैं।  आइबी की रिपोर्ट और केंद्रीय गृह मंत्रालय की सूचना के बाद बिहार पुलिस मुख्यालय ने जिलों को अलर्ट किया है। बताया गया कि देश के कई हिस्सों में फिदायीन दस्ते को हमले के लिए तैयार करने का इनपुट मिला है। इस अलर्ट के बाद सभी जिलों में सतर्कता बढ़ाए जाने को कहा गया है। इस बीच आईबी ने भी बिहार को लेकर अलर्ट जारी किया है।वहीं, सीतामढ़ी में भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नुपूर शर्मा का वीडियो देखने पर युवक पर चाकूओं से हमला का मामले सामने आने के बाद पुलिस मुख्यालय पूरी तरह चौकस हो गया है। केन्द्रीय एजेंसियों से मिले इनपुट को देखते हुए पुलिस मुख्यालय में उच्चस्तरीय बैठक की गई। बैठक में आइबी अलर्ट, फुलवारी मॉड्यूल और सीतामढ़ी मामले को लेकर सघन चर्चा हुई। सूत्रों के अनुसार जांच और गिरफ्तार लोगों से हुई पूछताछ में यह बात सामने आई है कि पीएफआई के टारगेट पर बिहार- बंगाल का सीमांचल इलाका था। इस संगठन के लोगों की योजना ब्रेन वाश कर सीमांचल के बेरोजगार व अशिक्षित मुस्लिम युवाओं को पीएफआई से जोड़ने की थी। इन्हें हथियार चलाने की ट्रेनिंग देनी थी। सूत्रों के अनुसार इस बात का खुलासा रिमांड के दौरान फुलवारी शरीफ से गिरफ्तार अतहर परवेज ने किया है। पूछताछ में उसने यह भी राज उगला है कि पूर्णिया, अररिया, फारबिसगंज, किशनगंज, मधुबनी और दरभंगा में रहने वाले मुस्लिम युवा उनकी प्राथमिकता में शामिल थे। पूछताछ के दौरान बिहार के टेरर मॉड्यूल में तुर्की का टेरर मॉड्यूल से सीधा कनेक्शन सामने आया है। जांच में यह पता चला है कि तुर्की समेत कई मुस्लिम राष्ट्रों से पीएफआई को फंड मुहैया कराया जा रहा है। पता यह भी चला कि पटना समेत अन्य प्रशिक्षण केंद्रों पर युवाओं को प्रशिक्षण देने के लिए ज्यादातर प्रशिक्षक केरल से आते थे। ऐसे में केरल में पीएफआई की जड़ें काफी गहरी मानी जा रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत ने अपनी पत्रिका के नये एडिशन में भाजपा के खिलाफ हमले की बात लिखी है। इसे संगठन के ट्विटर हैंडिल पर शेयर किया गया था। साथ ही कई संगठन टेलीग्राम सहित मैसेजिंग एप पर भड़काऊ पोस्ट शेयर कर रहे हैं। इन बातों को ध्यान में रखते हुए हुए पुलिस मुख्यालय की तरफ से बिहार में सभी जिलों के एसएसपी और एसपी के साथ ही रेल पुलिस को सभी आवश्यक एहतियात बरतने का निर्देश दिया गया है।
ये नेता हैं निशाने पर
मालूम हो कि बिहार में भाजपा के 17 सांसदों और 77 विधायकों में गिरिराज सिंह, अश्विनी चौबे, डॉ संजय जायसवाल, हरिभूषण ठाकुर बचौल सहित कई नेता अपनी फायर ब्रांड छवि के कारण ऐसे लोगों के निशाने पर रहते हैं। केंद्र ने पहले ही एक दर्जन भाजपा नेताओं को वाइ और कई नेताओं को जेड श्रेणी की सुरक्षा भी दे रखी है।

पीएफआइ और एसडीपीआइ की फंडिंग की जांच करेगा इडी 
फुलवारीशरीफ से गिरफ्तार आतंकियों के मामले में एनआइए, आइबी और एटीएस के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय (इडी) भी सक्रिय हो गया है। सूत्रों के मुताबिक मंगलवार को दिल्ली स्थित इडी मुख्यालय ने इस संबंध में मामला दर्ज कर लिया। अब इडी की टीम पीएमएलए एक्ट के तहत पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआइ) की फंडिंग की जांच करेगी। केंद्रीय एजेंसी यह पता लगायेगी कि बिहार में 15 हजार से ज्यादा मुस्लिम युवाओं को ट्रेनिंग देने से लेकर 15 जिलों में कार्यालय चलाने का खर्च पीएफआइ के पास कहां से आता था। इसके लिए उनके बैंक खातों में हुए ट्रांजेक्शन की जांच की जायेगी। आशंका जतायी जा रही है कि यह पैसा हवाला के माध्यम से दूसरे देशों से पहुंचा है 

एनआइए की टीम ने ढाका से एक मदरसा शिक्षक को उठाया 

एनआइए की टीम ने ढाका में मंगलवार की शाम ताबड़तोड़ छापेमारी की और मोहब्बतपुर स्थित जामिया मारिया निस्वा मदरसा से अली असगर नामक शिक्षक को हिरासत में लिया. शिक्षक के रामगढ़वा स्थित घर गाद सिसवनिया में भी छापेमारी की गयी. उसे एनआइए पटना लेकर आयी है. इधर, इसके अलावा मदरसा के कुछ और शिक्षकों से पूछताछ के बाद उन्हें छोड़ दिया गया. अधिकारियों ने बताया कि आतंकी गतिविधियों को लेकर पूछताछ की जा रही है. असगर उक्त मदरसे में पढ़ाने के बाद ढाका स्थित एक मस्जिद में रात में विश्राम करता था. वहीं, दूसरी ओर मरगुब दानिश उर्फ ताहिर को 48 घंटे की रिमांड परलिया है।

अतहर के मोबाइल में नूपुर का नंबर व पता मिलने से सनसनी अतहर परवेज के मोबाइल फोन से भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा का फोन नंबर और उनका पता मिलने से सनसनी बढ़ गयी है। आशंका जतायी जा रही है कि कहीं पीएफआइ और एसडीपीआइ नूपुर परकिसी तरह के हमले की तैयारी में तो नहीं जुटे थे।

आतंकी संगठन स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) का बदला स्वरूप है पीएफआई

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) की एक कंपनी – इंटरमीडिया पब्लिशिंग लिमिटेड, केंद्रीय कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय में पंजीकृत है। कंपनी द्वारा वर्ष 2020 में मंत्रालय को दी गयी जानकारी के अनुसार इसके 12,171 शेयरधारक हैं, जिनके पास 24,56,380 (24 लाख से अधिक) शेयर हैं। केंद्रीय एजेंसियां इस मामले में चौकन्ना होकर जांच कर रही हैं।यह सभी शेयरधारक मुसलमान हैं यानि अन्य धर्म का कोई भी व्यक्ति इसमें शामिल नहीं है। इन शेयरधारकों के पास एक से लेकर बारह हजार तक शेयर हैं। जिसमें सर्वाधिक 2,10,907 (2 लाख से अधिक) शेयर एडवोकेट केपी मोहम्मद शरीफ नाम के एक व्यक्ति के पास है। अब प्रश्न उठता है कि यह केपी मोहम्मद शरीफ कौन है? दरअसल, जनवरी 2009 में केरल के मलप्पुरम जिले के मंजेरी शहर में नेशनल डेवलपमेंट फ्रंट (एनडीएफ) की एक साथ कई बैठकें हुई, जिसमें पत्रकारों को बताया गया कि एनडीएफ का पीएफआई में विलय हो गया है। वैसे, यह विलय 2006 में ही हो चुका था और तमिलनाडु का उग्रवादी संगठन मनिथा नीति पसाराई (एमएनपी) और कर्नाटक का फोरम फॉर डिग्निटी (केएफडी) भी इस प्रक्रिया में शामिल था। मनिथा नीति पसाराई का संस्थापक, एम गुलाम अहमद तमिलनाडु में सिमी का काम देखता था।

इस विलय में एनडीएफ, एमएनपी, और केएफडी से जुड़े जितने भी लोग थे, वे सभी पीएफआई के सदस्य बन गए। इन्ही में से एक प्रमुख व्यक्ति केपी मोहम्मद शरीफ भी था। आज इन उग्रवादी संगठनों के लगभग सभी सदस्यों के पास इंटरमीडिया पब्लिशिंग लिमिटेड के शेयर है, जिसमें अब्दुल मोहम्मद सलाम और ए सईद जैसे नाम भी शामिल है।

एनडीएफ के आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े होने के कई सबूत उपलब्ध है। वर्ष 2010 में केरल के कॉलेज लेक्चरर टी.जे. जोसेफ पर ईशनिंदा का आरोप लगाकर एक मुस्लिम उग्रवादी ने उनका हाथ काट दिया। इस घटना के संदर्भ में केरल पुलिस ने जांच के दौरान पीएफआई से जुड़े कुंजुमों नाम के व्यक्ति के घर पर छापा मारा। उसकी कार से एक सीडी बरामद हुई, जिसमें अलकायदा और तालिबान द्वारा नृशंस हत्या करने का प्रशिक्षण दिया गया था। कुंजुमों, पीएफआई से पहले एनडीएफ से भी जुड़ा हुआ था।

एनडीएफ 1989 के आसपास बना लेकिन सुर्खियों में 1993 के बाद आना शुरू हुआ। 1997 में कोझीकोड शहर की पुलिस कमिश्नर रही नीरा रावत ने खुलासा किया था कि एनडीएफ को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आइएसआई से पैसा मिलता है। वर्ष 2003 में एनडीएफ का मुखिया पी. कोया नाम का एक व्यक्ति था। आजकल यह इंटरमीडिया पब्लिशिंग लिमिटेड का निदेशक एवं शेयरधारक दोनों है।

कोया, जनवरी 2006 में शुरू हुए पीएफआई के मुखपत्र तेजस का भी काम देखता था जोकि इंटरमीडिया पब्लिशिंग लिमिटेड का ही एक प्रकाशन है। वर्ष 2011 में तेजस के एक अंक में ओसामा बिन लादेन को ‘शहीद’ का दर्जा दिया गया था। बिन लादेन के चलते यह अंक चर्चा में आ गया, लेकिन तेजस का एकमात्र मकसद मुस्लिम युवाओं को आतंकवाद की राह पर धकेलना होता था।

इसलिए 25 नवम्बर 2009 को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक चिट्ठी लिखकर केरल की तत्कालीन वामपंथी सरकार को तेजस के बारे में सचेत किया। इस दवाब के बाद, राज्य सरकार ने तेजस को सरकारी विज्ञापन देना बंद कर दिया। यानि कई सालों तक तेजस आतंकवाद फैलाने के लिए सरकारी पैसे का इस्तेमाल करता रहा और राज्य सरकार ने इस मामले पर कभी गंभीरता से विचार भी नही किया।

कोया, आतंकी संगठन स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) का संस्थापक सदस्य भी था। जुलाई 2009 में पीएफआई ने सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) नाम से एक राजनीतिक इकाई शुरू की। इसका नेतृत्व ई. अबुबकर के पास था जोकि केरल में 1982 से 1984 तक सिमी का सर्वेसर्वा था। अबूबकर के पास भी इंटरमीडिया पब्लिशिंग लिमिटेड के शेयर है।

सऊदी अरब में भारतीय मुसलमानों की एक संस्था – इंडिया फर्टेनिटी फोरम (आईएफएफ) काम करती है। भारत के प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को मिली खुफिया जानकारी के अनुसार आईएफएफ के माध्यम से ही पीएफआई वहां पैसा जुटाता है। इन दोनों संस्थाओं के बीच की कड़ी का काम एसडीपीआई करती है।

सिमी के आतंकवादी हमलों में शामिल रहने के पुख्ता सबूतों के कारण वर्ष 2001 में तत्कालीन वाजपेयी सरकार ने इस पर प्रतिबंध लगा दिया था। जिसके बाद यह प्रतिबंध यूपीए सरकार के समय भी जारी रहा। हालांकि, यूपीए सरकार में कई बार इस पर लगा प्रतिबंध हटाने की कोशिशें चलती रही। जब कोई राहत नही मिली तो सिमी ने पीएफआई नाम से दूसरा संगठन बना लिया और देशभर में आतंकवाद को फैलाने का क्रम पहले की तरह चलता रहा।

सिमी के पाकिस्तानी आतंकी संगठनो इंडियन मुजाहिद्दीन और लश्कर-ए-तैयबा से जगजाहिर संबंध थे जोकि पीएफआई में भी कायम रहे। सितम्बर 2010 को केरल पुलिस ने पीएफआई-लश्कर संबंधों के सिलसिले में केरल उच्च न्यायालय को बताया कि वह इसकी जाँच कर रही है। पुलिस का शक इसलिए अधिक गहरा हुआ क्योंकि लश्कर का एक आतंकी टी. नासिर पीएफआई के एर्नाकुलम जिले के दफ्तर में कई दिनों तक रहा था। मगर केरल के तत्कालीन वामपंथी मुख्यमंती, वीएस अच्युतानंदन ने मुस्लिम तुष्टिकरण अथवा वोट बैंक के कारण पुलिस को जांच करने से रोक दिया।

26/11 आतंकवादी हमलों के मुख्य आरोपी फैयाज कागजी के सिमी और लश्कर-ए-तैयबा दोनों से संबंध थे। इसने वर्ष 2008 में श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में पुणे जर्मन बेकरी के आरोपी मिर्जा हिमायत बेग को बम बनाने का प्रशिक्षण दिया था। इसके अलावा, सिमी और पीएफआई के आतंकियों को पुलिस पूछताछ से आसानी से निपटने का भी प्रशिक्षण हिमायत बेग ही देता था।

वर्ष 2012 में केरल के मुख्यमंत्री ओमान चांडी के कार्यकाल में राज्य पुलिस ने पहली बार खुलकर बताया कि पीएफआई और सिमी एक ही है। अप्रैल 2013 में केरल पुलिस ने पीएफआई के संगठन, थानल चेरिटेबल ट्रस्ट में छापा मारकर बम बनाने एवं इंसानों को शूट करने की प्रशिक्षण सामग्री, बारूद, तलवारें, विदेशी मुद्रा, ईरानी प्रवेश पत्र सहित पीएफआई और एसडीपीआई के पर्चे जब्त किये थे।

एनडीएफ, पीएफआई, एसडीपीआई से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति एवं संबद्ध संस्थाओं का सिमी के साथ संबंध जरूर मिलता है। इनकी कार्यशैली भी सिमी से एकदम मेल खाती हैं। अतः जब सिमी को प्रतिबंधित किया तो उसने दूसरे रास्तों से आतंकवाद को फैलाने का तरीका ढूंढ लिया। अब सिमी के यह आतंकी कंपनियां पंजीकृत करा रहे है, और चुनाव भी लड़ रहे है। आतंकवाद फ़ैलाने के प्रयास कम नहीं हुए हैं सिर्फ उनका नाम और स्वरुप बदला है। रिपोर्ट अशोक झा

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