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ठाकुरगंज के हरगौरी मंदिर अपने आप में एक चमत्कार 200 वर्ष पुराना है इसका इतिहास, सावन में शिवपुराण की धूम

ठाकुरगंज के हरगौरी मंदिर अपने आप में एक चमत्कार
200 वर्ष पुराना है इसका इतिहास, सावन में शिवपुराण की धूम
– भूमि और मंदिर से जुड़ा है रविंद्र नाथ ठाकुर का परिवार
ठाकुरगंज हरगौरी मंदिर के स्वयंभू शिव लिंग के आकार का हो रहा क्षरण
– पुजारी समेत शिव भक्तों सता रही चिंता, महाभारत काल में कभी कुंती ने की थी इस शिवलिंग की पूजा
अशोक झा, सिलीगुड़ी: भारत -नेपाल बंगाल और बांग्लादेश की सीमावर्ती किशनगंज जिले के ठाकुरगंज में स्थापित है हरगौरी मंदिर। यहां का शिवलिंग स्वयं भू है। जिसके एक और मां पार्वती की आकृति इसकी महत्ता बढ़ाती है। रविंद्रनाथ टैगोर से जुड़े होने के कारण इसे बिहार का देवघर माना जाता है। कहते हैं कि बाबा की असीम कृपा है कि इस नगरी में बाबा के अलावा किसी की हनक पर धमक आज तक नहीं चल पाया है। सावन माह के मौके पर  इन दिनों मंदिर प्रांगण में शिवपुराण कहा जा रहा है। भक्तों में जबरदस्त उत्साह है। इस पूजा में प्रतिदिन दूर-दूर से भक्त परिवार समेत सम्मिलित हो रहे है। ठाकुर के पूर्व विधायक गोपाल अग्रवाल पूर्व नगर पंचायत चेयरमैन देवकी अग्रवाल समाजसेवी निरंजन मोर सिलीगुड़ी निवासी सुशील अग्रवाल आदि अपना पूरा योगदान दे रहे हैं। वयोवृद्ध आचार्य पंडित यशोधर झा का कहना है कि इन दिनों 100 वर्षों के बाद देखा जा रहा है कि स्वयंभू शिवलिंग का क्षरण हो रहा है। इसका प्रमुख कारण लगातार हजारों की संख्या में आने वाले श्रद्धालु और पूजा के दौरान जलाभिषेक के साथ कई प्रकार के वस्तुओं के साथ बाबा भोलेनाथ का जलाभिषेक करना है। शहर के वयोवृद्ध आचार्य पंडित यशोधर झा का कहना है कि महाभारत काल में अज्ञातवास के दौरान इस शिवलिंग की पूजा पांडव और कुंती के द्वारा किया गया था। इस बात को इसलिए भी बल मिलता है क्योंकि यहां से मात्र 7 किलोमीटर दूर नेपाल के कीचक वध में भीम ने कीचक का वध किया था। जिसका प्रमाण आज भी वहां विद्यमान है। पुरातत्व विभाग को चाहिए कि इस अलौकिक  शिवलिंग का हर प्रकार के संरक्षण करें। उन्होंने कहा कि आज महाशिवरात्रि के अवसर पर शिव भक्तों द्वारा अपने आराध्य देव के संरक्षण का विचार सराहनीय है। उन्होंने कहा कि भगवान भोलेनाथ के भक्तों के लिए प्रतिवर्ष सावन और शिवरात्रि का इंतजार रहता है। 
क्यों है यह महत्वपूर्ण शिवलिंग और स्थान
ठाकुरगंज प्राचीन नाम कानपुर को 1880 ई० में रविन्द्र नाथ टैगोर के वंशज सर ज्योतीन्द्र मोहन ठाकुर ने खरीदा।उसी समय इसका  नाम बदलकर ठाकुरगंज रखा गया। 1897 ई० में ठाकुर परिवार द्वारा पूर्वोत्तर कोण में पाण्डव काल के भग्नावशेष की खुदाई कराया जा रहा था। इसके बीच बांस के झाड़ कि नीचे से इस शिवलिंग के साथ कई और शिवलिंग को देखा गया। इस शिवलिंग की अपनी अलग पहचान है यह एक फुट उँचा काले पत्थर का है। जिसमें आधा जगतजननी माता पार्वती अंकित है। ठाकुर परिवार इसे कलकत्ता में स्थापित करना चाहते थे। किन्तु स्वप्न में निर्देश प्राप्त होने पर टीन के बने छोटे मकान में बंगला सम्वत 21 माघ1947  को ठाकुर परिवार द्वारा ठाकुरगंज मे स्थापना कि गई । ठाकुर परिवार द्वारा मन्दिर प्रांगण में लगी प्लेट के आधार पर यह प्रमाणित है कि 8 फरवरी 1901 से हर गौरी मन्दिर की पूजा अर्चना प्रारंभ हुई। ठाकुर परिवार द्वारा नियुक्त पुरोहित भोलानाथ गांगुली का परिवार आज भी कार्यरत है। आज भी मंदिर परिसर के क्षेत्र को राज्य सरकार द्वारा अधिग्रहित नहीं किया गया। इस शिवलिंग की पुरे भारतवर्ष मे अलग पहचान है। इस मन्दिर को हर गौरी धाम के नाम से जाना जाता है। यहां आने वाले सभी भक्तों की मनोकामना निश्चित रूप से पूर्ण होती है यही कारण है कि यहां राजी हो या देश विदेश के नेता अभिनेता और भक्त अपनी मनोकामना मांगने पहुंचते हैं। शिव मंदिर का जीर्णोद्धार शहर के ही
 दिवगंत गनपतराम अग्रवाल, दिवगंत सुधिर कुमार लाहिड़ी, भूतपूर्व आपूर्ति निरीक्षक रुद्रानंद झा के अथक प्रयास से जन सहयोग के माध्यम से हर गौरी मंदिर के भव्य रूप का सपना साकार  किया गया। इस मंदिर निर्माण के पीछे भी एक लंबी और अद्भुत कहानी है। मंदिर के100  वर्ष पूरा होने पर मंदिर के रंग रोगन के साथ शताब्दी उत्सव फरवरी 2001में सुशील कुमार अग्रवाल ठाकुरगंज मूलनिवासी जो वर्तमान सिलीगुड़ी सिलीगुड़ी के निवासी है उनके नेतृत्व में संपन्न हुआ था। आज भी सुशील कुमार अग्रवाल पूरे परिवार के साथ मंदिर के हर कार्यक्रम में सम्मिलित होते आ रहे हैं। रिपोर्ट अशोक झा

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