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तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो की सहमति के बाद ही बीजेपी केंद्रीय नेतृत्व ने अंतिम फैसला लिया

तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो की सहमति के बाद ही बीजेपी केंद्रीय नेतृत्व ने अंतिम फैसला लिया
-दार्जिलिंग दौरे के दौरान राजभवन में सीएम ममता बनर्जी, राज्यपाल धनखड़ और असम के सीएम हिमंत बिस्व सरमा के बीच बैठक
-क्या धनखड़ की उम्मीदवारी का समर्थन करेंगी ममता बनर्जी? कल बुलाई बैठक
 अशोक  झा, सिलीगुड़ी:  पश्चिम बंगाल के राज्यपाल पद पर आसीन होने के बाद से राज्यपाल जगदीप धनखड़ और सीएम ममता बनर्जी के बीच लगातार तकरार हो रही थी। राज्यपाल धनखड़ लगातार सीएम ममता बनर्जी  पर कानून-व्यवस्था की स्थिति, चुनाव के दौरान हिंसा और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर हमला बोल रहे थे। सीएम ममता बनाम राज्यपाल के बीच घमासान मीडिया की सुर्खियों में रहा है। सीएम ममता बनर्जी पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर धनखड़ को हटाने की मांग करती रही हैं, लेकिन पीएम नरेंद्र मोदी और बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व लगातार इस मांग को खारिज करती रही है, लेकिन इस विवाद के बीच उपराष्ट्रपति पद  के लिए जगदीप धनखड़ को राजग का उम्मीदवार बनाने के फैसले से कई सवाल उठे हैं। कुछ राजनीतिक विश्लेषक इसे सीएम ममता बनर्जी की राज्यपाल धनखड़ से मुक्ति मान रहे हैं, तो दूसरा पक्ष इसे ममता बनर्जी और बीजेपी केंद्रीय नेतृत्व के बीच सांठगांठ बता रहा है। तीन दिन पहले दार्जिलिंग दौरे के दौरान राजभवन में सीएम ममता बनर्जी, राज्यपाल धनखड़ और असम के सीएम हिमंत बिस्व सरमा के बीच बैठक में इस पर चर्चा हुई और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो की सहमति के बाद ही बीजेपी केंद्रीय नेतृत्व ने अंतिम फैसला लिया है। बता दें कि तीन दिन पहले दार्जिलिंग दौरे के दौरान दार्जिलिंग के राजभवन में सीएम ममता बनर्जी, गर्वनर धनखड़ और असम के सीएम सरमा के बीच बैठक हुई थी। सूत्रों का कहना है कि उस बैठक में बीजेपी केंद्रीय नेतृत्व के फैसले से ममता बनर्जी को अवगत कराया गया था। उसके बाद ही धनखड़ दिल्ली गए और वहां कल केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और आज पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। उस मुलाकात के बाद ही बीजेपी ने धनखड़ को उपराष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार घोषित कर दिया।

सांप भी मर गया और लाठी भी नहीं टूटी
राज्यपाल धनखड़ लगातार सीएम ममता बनर्जी का विरोध कर रहे थे। ममता उन्हें हटाने की मांग कर रही थी। ऐसी स्थिति में बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व ने राज्यपाल धनखड़ को उपराष्ट्रपति का उम्मीदवार बनाकर एक तीर से कई निशान कर डाले। बंगाल से धनखड़ को हटाने की मांग को स्वीकार भी कर लिया और उस फैसले को एक तार्किक स्थान भी प्रदान कर दिया। वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक पार्थ मुखर्जी का कहना है कि हाल के दिनों में ममता बनर्जी ने जिस तरह से बैकफुट पर नजर आ रही हैं। हाल में उनके लिए फैसले इसकी पुष्टि कर रहा है। ममता बनर्जी ने पहले यशवंत सिन्हा को राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार बनाने की पहल की और फिर द्रोपदी मुर्मू के मुद्दे पर अपना नरम रवैया अपनाया और यशवंत सिन्हा का चुनाव प्रचार के लिए नहीं आना उसी ओर इशारा करता है। इस तरह से सांप भी मर गया और लाठी भी नहीं टूटी।

क्या धनखड़ की उम्मीदवारी का समर्थन करेंगी ममता बनर्जी? कल बुलाई बैठक
दूसरी ओर, टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने कल शाम चार बजे लोकसभा और राज्यसभा सांसदों की बैठक बुलाई है। इस बैठक में उपराष्ट्रपति चुनाव के उम्मीदवार को लेकर फैसला लिया जाएगा। यह बैठक ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास में होगी. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ममता बनर्जी धनखड़ की उम्मीदवारी का समर्थन करेंगी या फिर विरोध करेंगी? संभव है कि चूंकि धनखड़ राज्य के राज्यपाल हैं, ऐसी स्थिति में बृहत्तर राजनीतिक हित के लिए ममता बनर्जी धनखड़ की उम्मीदवारी का समर्थन कर दें। जैसा की झारखंड के सीएम और झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रमुख हेमंत सोरेन ने द्रोपदी मुर्मू के संबंध में किया है या फिर उनकी पार्टी उपराष्ट्रपति चुनाव के दौरान मतदान से खुद को अलग रखे, क्योंकि जिस तरह से धनखड़ ममता बनर्जी की सरकार का विरोध कर रहे थे. उस स्थिति में पूरी तरह से समर्थन करना शायद पार्टी के लिए संभव नहीं होगा. तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत राय कहते हैं कि इतना तो साफ है कि धनखड़ को ममता बनर्जी का विरोध करने का पुरस्कार मिला है और बंगाल को मुक्ति धनखड़ से मुक्ति मिली है, लेकिन कल की बैठक में क्या फैसला होता है। यह पार्टी ही तय करेगी कि चुनाव के दौरान क्या करना है। माकपा के नेता सुजन चक्रवर्ती कहते हैं कि धनखड़ के उम्मीदवार बनने से वह अचंभित नहीं हैं, क्योंकि सभी ने दार्जिलिंग की बैठक को देखा है। रिपोर्ट अशोक झा

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