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शिव आराधना का सावन महीना आज से -सावन के चारों सोमवार को शिव आराधना के लिए शिव मंदिरों में भक्तों का मेला लगेगा

शिव आराधना का सावन महीना आज से
-सावन के चारों सोमवार को शिव आराधना के लिए शिव मंदिरों में भक्तों का मेला लगेगा
अशोक झा, सिलीगुड़ी:  शिव आराधना का सावन महीना 14 जुलाई से 12 अगस्त तक रहेगा। इस माह में कई तीज-त्योहारों का उल्लास छाएगा। सावन के चारों सोमवार को शिव आराधना के लिए शिव मंदिरों में भक्तों का मेला लगेगा।दो साल के कोरोना विराम के बाद श्रद्धा व उल्लास से कावड़ यात्राएं निकाली जाएंगी।इन त्योहारों का उल्लास छाएगा -18 जुलाई को श्रावण का पहला सोमवार,25 जुलाई को श्रावण का दूसरा सोमवार, 28 जुलाई को हरियाली अमावस्या, 31 जुलाई को हरियाली तीज ,1 अगस्त को श्रावण तीसरा सोमवार 2 अगस्त को नाग पंचमी, 8 अगस्त को श्रावण का चौथा सोमवार ,11 अगस्त को रक्षाबंधन। इस मौके पर मंदिरों में  पार्थिव शिवलिंग का निर्माण किया जाएगा और शाही सवारियां निकलेंगी। ज्योतिर्विद शिवप्रसाद तिवारी के मुताबिक 30 दिनी सावन माह की शुरुआत गुरुवार से हो रही है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह माह शिव को अत्यंत प्रिय है। कहा जाता है कि इस माह शिव आराधना से सभी मनोकामना पूरी होती है।
71 वैदिक विद्वान करेंगे अतिरुद्र महायज्ञ : एरोड्रम रोड स्थित श्रीविद्याधाम पर श्रावण मास में अभिषेकात्मक शिव आराधना महामंडलेश्वर स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती के सान्निध्य में होगी। प्रतिदिन सुबह 9 बजे से वैदिक ब्राह्मणों द्वारा लघु रुद्राभिषेक, शाम 5 बजे से सामूहिक शिव महिम्न पाठ, शाम 5.30 बजे से सामूहिक लक्षार्चन आराधना एवं रात्रि 9 बजे से सामूहिक शिव आराधना के अनुष्ठान होंगे।

51 लाख पार्थिव शिवलिंग बनेंगे – पार्थिव शिवलिंग निर्माण समिति द्वारा हरिधाम कैट रोड पर 51 लाख पार्थिव शिवलिंग का निर्माण 14 जुलाई से 10 अगस्त तक किया जाएगा। महंत शुकदेव महाराज के अनुसार पार्थिव शिवलिंग प्रतिदिन मातृशक्तियां सुबह 9 से 12 बजे तक बनाएंगी।

शिवधाम में प्रतिदिन रुद्राभिषेक – गेंदेश्वर द्वादश ज्योतिर्लिंग परदेशीपुरा (शिवधाम) में प्रतिदिन सुबह 9 बजे शिव का रुद्राभिषेक किया जाएगा। अभिषेक दूध, दही, शहद, गन्ने का रस, गंगाजल से होगा। इसके बाद भोग लगाया जाएगा। महिलाएं पार्थिव शिवलिंग बनाएंगी। अगर सावन में ये चीजें शिवजी को अर्पित की जाएं तो इंसान की हर मनोकामना पूरी हो सकती है।

शमी के पत्ते- भगवान शिव की पूजा में शमी के पत्ते भी चढ़ाए जाते हैं. शमी को शनिदेव का पेड़ माना जाता है. इसलिए शिवलिंग पर इसके पत्ते चढ़ाने से भोलेनाथ के साथ-साथ शनिदेव भी प्रसन्न होते हैं. ढैय्या या साढ़े साती से प्रभावित लोग भी इसे शिवलिंग पर चढ़ा सकते हैं।

धतूरा- सावन में शिवलिंग पर धतूरा चढ़ाने की परंपरा होती है. धतूरा भगवान शिव को बेहद प्रिय है. ऐसा कहा जाता है कि शिवलिंग पर धतूरे के फूल चढ़ाने से पुत्र प्राप्ति हो सकती है. शिव की पूजा में लाल डंठल वाला धतूरा भी चढ़ाया जाता है।

भांग- भगवान शिव को भांग भी बहुत प्रिय है. वैसे तो ये एक नशीला पौधा होता है, लेकिन आयुर्वेद के साथ-साथ शिवजी की पूजा इसका विशेष महत्व बताया गया है. सावन में भांग से शिव का श्रृंगार करने से मनोवांछित वरदान मिल सकता है।

बिल्व पत्र- जीवन में कोई संकट हो या काम में रुकावट आ रही हो तो सावन में भगवान शिव को बिल्व पत्र यानी बिल्व के पत्ते जरूर चढ़ाएं. शास्त्रों के अनुसार, बिल्व की जड़ में स्वयं भगवान शिव का वास होता है।

आक या मदार के फूल- भगवान शिव को आक के फूल भी अर्पित किए जाते हैं. शिवपुराण के अनुसार, लाल और सफेद रंग के आंकड़े के फूल चढ़ाने से मोक्ष की प्राप्ति होती है. इसका पौधा मुख्य द्वार पर लगाना भी बहुत शुभ माना जाता है। रिपोर्ट अशोक झा

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