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वाल्मीकि रामायण को संस्कृत से नेपाली में अनुवाद करने वाले पहले व्यक्ति भानुभक्त आचार्य

वाल्मीकि रामायण को संस्कृत से नेपाली में अनुवाद करने वाले पहले व्यक्ति भानुभक्त आचार्य
-नेपाली भाषा  की आधारशिला रखने के लिए याद किया जाता हैअशोक झा, सिलीगुड़ी भानु जयंती: गुरु पूर्णिमा यानी अषाढ़ पूर्णिमा पूरे देश में मनाई जा रही है। यह दिन हमारे पड़ोसी देश नेपाल में ‘भानु जयंती’ के रूप में मनाया जा रहा है। नेपाल के विख्यात कवि, लेखक और अनुवादक भानुभक्त आचार्य की आज जयंती है।
उन्हें नेपाली भाषा का पहला लेखक माना जाता है। वाल्मीकि रामायण को संस्कृत से नेपाली में अनुवाद करने वाले पहले व्यक्ति होने की वजह से उन्हें आदि कवि की उपाधि दी गई। अज्ञानता या जानबूझकर नेपाली समुदाय के लोगों को विदेशी कहा जाता है जबकि इनका भारतवर्ष से गहरा नाता है। प्रत्येक वर्ष नेपाली पंचांग अनुसार आषाढ़ माह के उनतीसवें दिन आचार्य के जन्मदिन के अवसर पर नेपाल सरकार और दुनियाभर मौजूद नेपाली जनता द्वारा भानु जयंती मनाई जाती है। भानुभक्त आचार्य को नेपाली भाषा  की आधारशिला रखने के लिए याद किया जाता है। भानु जयंती भारत के साथ-साथ दुनिया भर में नेपाली लोगों द्वारा मनाया जाता है. यह पर्व नेपाल, दार्जिलिंग, सिक्किम और म्यांमार और भूटान जैसे विभिन्न देशों के लोगों द्वारा मनाई जाती है. यह दिन नेपाली संस्कृति का उत्सव है. भानुभक्त को राष्ट्रीय विभूति यानी नेपाल के राष्ट्रीय नायकों में से एक के रूप में भी नामित किया गया है।
नेपाली भाषा की आधारशिला रखी
प्राचीन काल में नेपाली सहित दक्षिण एशियाई भाषाएं ज्यादातर मौखिक माध्यम तक सीमित थीं जिसकी वजह से सो भाषाओं में लेखन कम ही होता था. दक्षिण एशिया के लिखित ग्रंथ अधिकांश संस्कृत में उपलब्ध होने की वजह से वे आम जनता की पहुंच से दूर थे. चूंकि शिक्षकों, छात्रों और पंडितों के पद में ब्राह्मणों की अग्रता थी, सभी धर्म ग्रंथों तथा अन्य साहित्यिक कृतियों की पहुंच ब्राह्मणों और संस्कृत में शिक्षा प्राप्त करनेवाले व्यक्तियों तक सीमित थे.- निर्बल और शोषित की खामोश ‘आह’ हैं कुमार अम्बुज की कविताएं
नेपाल में संस्कृत में कविता रचना तो होती थी लेकिन आचार्य ने नेपाली भाषा में कविता लिखना शुरू किया. भानुभक्त ने न तो कभी पश्चिमी शिक्षा प्राप्त की न ही वे विदेशी साहित्य से परिचित थे जिसके कारण उनकी कृतियों में एक विशिष्ट नेपाली स्पर्श पाया जाता है.चर्चित रचनाएं
भानुभक्त आचार्य की जीवनी लिखते समय मोतीराम भट्ट ने पहली बार उन्हें नेपाल के ‘आदि कवि’ के रूप में संदर्भित किया. भट्ट ऐसे कवि हैं जिन्होंने आचार्य की सभी पांडुलिपियों और साहित्य के कार्यों को प्रकाशित किया. 1887 में कवि मोतिराम भट्ट ने आचार्य की कृतियां पता लगाकर वाराणसी में मुद्रण के लिए ले जाने के बाद ही उनकी कृतियों का प्रकाशन हुआ। भानुभक्त ने अपने जीवन में कुल दो उत्कृष्ट रचनाएं लिखीं जिनमें ‘भानुभक्तीय रामायण’ और ‘कारावास में प्रधानमंत्री के लिए लिखी गई चिट्ठी’ शामिल हैं. आधिकारिक काग़जात में हस्ताक्षार करते समय हुई गलतफहमी की वजह से उन्हें कारावास की सजा सुनाई गई. कारावास में उनका स्वास्थ्य बिगड़ गया. उन्होंने अपनी रिहाई की विनती करते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री को एक चिट्ठी लिखी जिसे वर्तमान में उनकी उत्कृष्ट रचनाओं में से एक मानी जाती है। उस चिट्ठी में लिखी गई कविता ने न केवल उन्हें कारावास से रिहाई दिलाई बल्कि उन्हें क्षतिपूर्ति के लिए पैसे भी दिए गए. 1868 में उनकी मृत्यु के समय में उन्हें ज्ञात नहीं था कि किसी जमाने में वे नेपाल के सबसे विख्यात कवियों में से एक होंगे. उनके जीवन में उनकी रचनाएं अप्रकाशित रहीं जिसकी वजह से उस वक़्त उन्हें अपनी कृतियों का श्रेय नहीं मिला। भानुभक्त ने रामायण सहित कई अन्य संस्कृत साहित्यिक ग्रंथों का नेपाली में अनुवाद किया. उनकी साहित्यिक कृतियों में ‘कांटीपुरी नगरी’, ‘एक मन चित्त लगा चकरी ग्या’, ‘ख्वामित या गिरिधारी ले’, ‘बालाजी देखन’, ‘मा भानुभक्त’, ‘रोज रोज दर्शन पांचु’, ‘प्रश्नोत्तर माला’, ‘भक्त माला’ और ‘राम गीता’ हैं।
दुनियाभर में आयोजन
नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा ने इस अवसर पर शुभकामनाएं दी हैं. अपने संदेश में उन्होंने कहा कि भानुभक्त एक ऐसे नायक हैं जिन्होंने भाषाविज्ञान के माध्यम से सभी को एकीकृत किया है. उनकी रचनाओं ने मेची से लेकर महाकाली तक सभी को एक कर दिया है।सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने भानु उद्यान में भानुभक्त आचार्य की नई प्रतिमा का अनावरण किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि आदिकवि भानुभक्त आचार्य एक प्रख्यात विद्वान थे जिन्होंने नेपाली साहित्य में बहुत योगदान दिया। मिनिस्ट्री फॉर डेवलपमेंट ऑफ़ नार्थ ईस्टर्न रीजन ने भी इस अवसर पर बधाई देते हुए कहा, “भानु जयंती के सम्मान के अवसर पर सिक्किम के लोगों को हार्दिक बधाई. भानुभक्त आचार्य संस्कृत से नेपाली भाषा में संपूर्ण रामायण का अनुवाद करने वाले पहले लेखक थे। रिपोर्ट अशोक झा

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