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मुस्लिम युवाओं का ब्रेनवाश कर रहा PFl

मुस्लिम युवाओं का ब्रेनवाश कर रहा PFl
– क्यों पूरे देश में बैन करने की उठ रही मांग
– कई रिपोर्टों में खुलासा, विदेशी फंड से देश को अस्थिर करने की रची जा रही साजिश 
अशोक झा, सिलीगुड़ी: अभी हाल के कुछ महीनों में देशभर में हिंसक घटनाएं तेजी से सामने आई है। जांच में यह बात सामने आई है कि मुस्लिम युवकों को हिंसक घटना के लिए ब्रेनवाश किया जा रहा है। सवाल ये है कि ये Brain Wash करता कौन है? अगर इस मामले में देखें तो आरोप Popular Front of India यानी PFI नाम के संगठन पर है।PFI वही संगठन है, जिसका नाम दिल्ली में दंगे भड़काने, शाहीन बाग के आन्दोलन को फंडिंग करने, केरल में राजनीतिक हत्याओं की योजना बनाने और जबरन धर्म परिवर्तन के भी कई मामलों में सामने आ चुका है। इस संगठन की स्थापना वर्ष 2006 में केरल में हुई थी. उस समय दक्षिण भारत के तीन मुस्लिम संगठनों का विलय करके PFI नाम का ये संगठन बना था। ये संगठन थे। National Development Front यानी NDF। ये संगठन केरल का था. Forum for Dignity, ये मुस्लिम संगठन कर्नाटक का था और तीसरा संगठन था MNP, जो तमिलनाडु का मुस्लिम संगठन था।पीएफआई खुद को ‘नियो सोशल मूवमेंट’ कहता है जिसका विजन हाशिए पर जी रहे सभी लोगों को सशक्त करना है। इसके उलट कई जांच एजेंसियां, मसलन प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और राज्य पुलिस, कई मामलों में पीएफआई की जांच कर रही है। ये मामले देश के अलग-अलग हिस्सों में दर्ज हैं। पीएफआई से जुड़े अन्य विवादों के अलावा संगठन पर, केरल में सोने की तस्करी के रैकेट में शामिल होने, कर्नाटक और केरल में धर्मांतरण के लिए शादी, दिल्ली में सीएए विरोधी दंगों को प्रायोजित करने और ‘देशद्रोह’ और उत्तर प्रदेश में सांप्रदायिक हिंसा भड़काने  के आरोप लगे हैं। फिलहाल, एनआईए पूरे भारत में अलग-अलग मामलों में 100 से ज्यादा पीएफआई सदस्यों के खिलाफ जांच कर रही है. साथ ही, ईडी 2020 के दिल्ली दंगों और नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के विरोध में कथित रूप से फंडिंग करने के मामले में संगठन की जांच कर रही है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल भी, 2020 के दिल्ली दंगों के लिए कथित रूप से ‘लॉजिस्टिक्स मुहैया कराने’ में पीएफआई की भूमिका की जांच कर रही है। पीएफआई पर साजिश रचने और दंगों के लिए फंडिंग देने के आरोपों के बीच उसे प्रतिबंधित करने की मांग कई बार उठी है। साल 2019 में, उत्तर प्रदेश  सरकार ने पीएफआई पर सीएए विरोधी दंगों को भड़काने का आरोप लगाते हुए उसे प्रतिबंधित घोषित करने की मांग की. इसके साथ ही, एनआईए ने साल 2017 में गृह मंत्रालय को एक विस्तृत रिपोर्ट भेजी और संगठन पर प्रतिबंध लगाने की मांग की। एजेंसी ने पीएफआई को ‘राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा’ बताया था और दावा किया था कि संगठन, मलप्पुरम में सत्य सरानी जैसे संगठनों का इस्तेमाल ‘जबरन धर्मांतरण’ करने के लिए कर रहा था. एनआईए ने यह भी आरोप लगाया कि संगठन आतंकी हमले की साजिश रचने और बम बनाने में शामिल था। रिपोर्ट में एनआईए ने कहा कि पीएफआई 23 राज्यों में सक्रिय था. साथ ही, संगठन पर ‘युवाओं का ब्रेनवॉश‘ करने के लिए संस्थान चलाने और देशी बम बनाने की ट्रेनिंग देने का आरोप लगाया गया है।एनआईए ने जिन मामलों के आधार पर अपना दस्तावेज तैयार किया है, उनमें साल 2010 में केरल के इडुक्की जिले में प्रोफेसर टीजे जोसेफ पर कुल्हाड़ी से हमला करके उनका हाथ काट देना, बेंगलुरु में आरएसएस नेता आर रुद्रेश की हत्या, इस्लामिक स्टेट के अल हिंदी मॉड्यूल  की तरह ही दक्षिण भारत में गतिविधियां करने और साल 2010 में कन्नूर स्थित पीएफआई के अड्डों से बम, आईईडी, और तलवार की बरामदगी शामिल है।एजेंसी ने 2016 में स्पेशल एनआईए कोर्ट की ओर से 21 पीएफआई सदस्यों को सजा सुनाने के मामले का भी हवाला दिया है। साल 2013 में कन्नूर में एक आतंकी शिविर लगाने के आरोप में स्पेशल कोर्ट ने यह सजा सुनाई थी  एनआईए के एक सूत्र ने ‘हम पीएफआई से जुड़े डोजियर (सबूत के तौर पर पेश किए गए दस्तावेज) के आधार पर बैन चाहते थे. गृह मंत्रालय में यह अनुरोध लंबित है।पिछले साल अप्रैल महीने में, केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट  से कहा कि वह पीएफआई को बैन की ‘प्रक्रिया में हैं’ लेकिन ऐसा अबतक नहीं हुआ है। हमारे देश में एक शब्द काफ़ी इस्तेमाल होता है और वो शब्द है ब्रेनवाश Brainwash। ये शब्द पुलिस भी इस्तेमाल करती है, नेता भी इस्तेमाल करते हैं और राजनीतिक पार्टियां भी इसके नाम पर सियासत करती हैं । दुनिया में Brainwash शब्द का पहली बार परिचय 1950 के दशक में हुआ था। उस दौर में Brainwash का अर्थ होता था, अपने मस्तिष्क को साफ करना। यानी आपके मस्तिष्क में जो बुरे और नकारात्मक विचार हैं, उन्हें बाहर कर देना।  समय के साथ इस शब्द के मायने बदलते गए और आज ये शब्द तब इस्तेमाल होता है, जब कोई व्यक्ति दूसरे व्यक्ति के विचारों को प्रभावित कर अपनी सोच से ढाल लेता है। यानी अब Brain की Washing मस्तिष्क में नफरत का डेटा फीड करने के लिए होती है और इस्लामिक कट्टरवाद का ये पूरा मॉडल इसी Brain Wash के सिद्धांत पर टिका है।PFI की ओर से बताया गया है क‍ि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंड‍िया की राष्‍ट्रीय कार्यकारणी पर‍िषद की 23 और 24 मई को पुत्‍थनथानी में हुई। इसमें प्रस्‍ताव पार‍ित करके देश की जनता से अपील की गई क‍ि वह मुसलमानों की मस्‍ज‍िदों और पूजा स्‍थलों के ख‍िलाफ जारी कार्यवाह‍ियों का व‍िरोध करें। बैठक‍ में यह भी कहा गया क‍ि ज्ञानवापी मस्‍ज‍िद और मथुरा शाही ईदगाह मस्‍ज‍िद के ख‍िलाफ संघ पर‍िवार के संगठनों की हाल‍िया याच‍िकाएं पूजा स्‍थल अध‍िन‍ियम, 1991 के सरासर ख‍िलाफ हैं। अदालतों को इन्‍हें मंजूर नहीं करना चाह‍िए था।
ज्ञानवापी मस्‍ज‍िद के वजूखाने के इस्‍तेमाल पर प्रत‍िबंध न‍िराशाजनक। PFI ने कहा क‍ि सुप्रीम कोर्ट का ज्ञानवापी मस्‍ज‍िद के वजूखाने के इस्‍तेमाल पर प्रत‍िबंध को बाकी रखना अत्‍यंत न‍िराशाजनक है। अदालतों ने इस प्रकार के दावों को तथ्‍यों और सबूतों के अधार पर परखने की जरूरत भी महसूस नहीं की। इससे यह प्रभाव पड़ सकता है क‍ि देश में कोई भी कहीं भी क‍िसी भी पूजा स्‍थल के बारे में ऐसे दावे कर सकता है।दरअसल, पीएफआई एक इस्लामिक संगठन है। इस संगठन का दावा है कि इसे पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के हक में आवाज उठाने के लिए बनाया गया है। पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया का गठन 17 फरवरी 2007 को केरल में क‍िया गया था। इस संगठन की जड़ें केरल के कालीकट में बहुत गहरी हैं। वर्तमान में इसका हेड ऑफिस दिल्ली के शाहीन बाग में बताया जाता है। शाहीन बाग वही इलाका है, जहां पर सीएए और एनआरसी के विरोध में पूरे देश में 100 दिन तक सबसे लंबा आंदोलन चला था।
पीएफआई का आईएसआईएस कनेक्शन
केरल में पीएफआई द्वारा धर्म परिवर्तन और लव जिहाद की फैक्ट्री चलाने की खबरें तो बीते दिनों की बात हो गईं। ये बात किसी से छुपी नहीं है कि केरल के कई युवक ऐसे हैं जिन्होंने आतंकवादी संगठन आईएसआईएस को ज्वाइन किया। एनआईए की एक रिपोर्ट में भी केरल के कन्नूर में आईएसआईएस के एक कैंप बनाए जाने और 23 लड़कों को हथियार चलाने की ट्रेनिंग देने की भी बात सामने आई थी।एनआईए की उसी रिपोर्ट में केरल की पापुलर फ्रंट आफ इंडिया पर कई गंभीर आरोप लगाए गए थे। एनआईए की जांच में ये खुलासा हुआ था कि पीएफआई के कई सदस्य धर्म परिवर्तन के सिंडिकेट में शामिल हैं और कुछ आतंकी साजिश में भी पकड़े जा चुके हैं।गृह मंत्रालय को भेजी रिपोर्ट में पीएफआई के सभी मामलों की लिस्ट बनाई गई जिसमें उसके सदस्य शामिल थे। अब इसके कुछ उदाहरण आपको बता देते हैं। पहला मामला केरल के इडुकी जिले का है जहां पीएफआई से जुड़े लोगों पर एक प्रोफसर पर हमला करके उनका हाथ काट देने का आरोप लगा था।  शुरूआत में इसकी जांच केरल पुलिस ने की लेकिन बाद में उसकी जांच एनआईए को सौंप दी गई। जांच करने के बाद पीएफआई से 43 लोगों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल हुई। बेंगलूरू में आरएसएस कार्यकर्ता आर रूद्रेश की हत्या के पीछे भी पीएफआई की भूमिका थी।  एनआईए की जांच में ये खुलासा हुआ था कि पीएफआई ने फुल प्रूफ प्लानिंग करके दक्षिण भारत के अलग-अलग इलाकों में आरएसएस के कार्यकर्ताओं की हत्या की साजिश रची थी। एनआईए ने साल 2016 में केरल की अलग-अलग जगहों से आईएसआईएस के छह संदिग्ध लोगों को गिरफ्तार किया था। ये सभी उमर अल हिंदी माड्यूल के सदस्य थे। जो इराक में बैठे आईएसआईएस के इशारों पर केरल और देश के दूसरे हिस्सों में बड़े आतंकी हमले की साजिश रच रहे थे। एनआईए की रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि पीएफआई सुनियोजित तरीके से देश में तालिबानी सोच विकसित करने में लगा है। पीएफआई ने कुछ साल में बम बनाने से लेकर हथियार चलाने तक की ट्रेनिंग हासिल कर ली है। इसके अलावा पीएफआई ने अपना खुफिया तंत्र भी बना रखा है जिससे वो आसपास की जानकारियां इकट्ठा करता है। नागरिकता संशोधन कानून के नाम पर हो रहे विरोध प्रदर्शनों की सच्‍चाई अब सामने आने लगी है। यह बात पहले ही सामने आ चुकी है कि इनके पीछे सरकार विरोधी तत्‍व हैं और वहीं कुछ राजनीतिक दल भी इन विरोध प्रदर्शनों को हवा देने में लगे हैं। संगठन की जड़ें केरल के कालीकट से जुड़ी हुई हैं और इसका मुख्यालय दिल्ली के शाहीन बाग में स्थित है। एक मुस्लिम संगठन होने के कारण इस संगठन की ज्यादातर गतिविधियां मुस्लिमों के इर्द गिर्द ही घूमती हैं और पूर्व में तमाम मौके ऐसे भी आए हैं जब ये मुस्लिम आरक्षण के लिए सड़कों पर आए हैं। संगठन 2006 में उस वक़्त सुर्ख़ियों में आया था जब दिल्ली के राम लीला मैदान में इनकी तरफ से नेशनल पॉलिटिकल कांफ्रेंस का आयोजन किया गया था। तब लोगों की एक बड़ी संख्या ने इस कांफ्रेंस में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी।संगठन को बैन किये जाने की मांग 2012 में भी हुई थी। दिलचस्प बात ये है कि तब खुद केरल की सरकार ने पीएफआई का बचाव करते हुए केरल हाई कोर्ट को बताया था कि ये सिमी से अलग हुए सदस्यों का संगठन है जो कुछ मुद्दों पर सरकार का विरोध करता है। ध्यान रहे कि ये सवाल जवाब केरल की सरकार से तब हुए थे जब उसके पास संगठन द्वारा स्वतंत्रता दिवस पर आजादी मार्च किये जाने की शिकायतें आई थीं। इस बात में कोई शक नहीं है कि पीएफआई एक ऐसा संगठन है जो कट्टरपंथ को प्रमोट करता है। 

देश में 24 प्रदेशों में शाखाएं, महिला विंग भी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीएफआई की जड़ें देश के 24 राज्यों में फैली हुई हैं। कहीं पर इसके सदस्य अधिक सक्रिय हैं तो कहीं पर कम। मगर मुस्लिम बहुल इलाकों में ये बहुतायत पाए जाते हैं। इसकी अपनी महिला विंग भी है। संगठन खुद को न्याय, स्वतंत्रता और सुरक्षा का पैरोकार बताता है। साथ ही, मुस्लिमों के अलावा देश भर के दलितों, आदिवासियों पर होने वाले अत्याचार के लिए समय समय पर मोर्चा खोलता है। एक मुस्लिम संगठन होने के कारण इस संगठन की ज्यादातर गतिविधियां मुस्लिमों के इर्द गिर्द ही घूमती हैं। कई ऐसे मौके ऐसे भी आए हैं जब इस संगठन से जुड़े लोग मुस्लिम आरक्षण के लिए सड़कों पर आए हैं। पीएफआई वर्ष 2006 में उस समय सुर्खियों में आया था जब दिल्ली के रामलीला मैदान में इसकी तरफ से नैशनल पॉलिटिकल कांफ्रेंस का आयोजन किया गया था। तब इस कांफ्रेंस में बड़ी भीड़ जुटी थी।

कांग्रेस का हाथ,PFI के साथ?
– राजस्थान के कोटा में ‘यूनिटी मार्च’
– PFI के 75 वर्ष पूरे होने पर रैली
– जिला प्रशासन से PFI रैली को इजाजत
– PFI पर कई गंभीर आरोप- बीजेपी
– कई राज्यों में PFI बैन – बीजेपी

PFI के जिलाध्यक्ष साजिद खान ने कहा कि हिजाब हमारे लिए कोई मामला या मुद्दा नहीं है. यह हमारा संवैधानिक हक है और इसे हम हर्गिज नहीं छोड़ेंगे। 

PFI और बीजेपी आमने सामने
राजस्थान में PFI के मार्च को लेकर PFI और बीजेपी आमने सामने है. राजस्थान बीजेपी नेता सतीश पुनिया ने कहा,’ मुझे नहीं लगता है कि PFI की मंशा गणतंत्र बचाने की है. इस पर कई जगह पर बैन है और देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगे हैं. हिजाब के मामले के अलावा भी देश में कई मुद्दे हैं, जिन पर बात होनी चाहिए. मुझे नहीं पता कि पीएफआई जैसे संगठन को इस तरह के कार्यक्रम करने की अनुमति देनी चाहिए. इस तरह के कार्यक्रम से समाज को खतरा है.’ वहीं PFI का कहना है कि उनपर लगे आरोप अभी साबित नहीं हुए हैं. 

PFI पर क्या हैं आरोप? 
– 2010 में केरल में एक प्रोफेसर का हाथ काटा  
– सऊदी अरब जैसे मुस्लिम देशों से फंडिंग
– आतंकवादी संगठन ISIS से भी संबंध 
– जबरदस्ती धर्मांतरण और लव जिहाद 

क्या है PFI? 
– 1993 में केरल में नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट का गठन हुआ
– 2006 में NDF का नाम Popular Front of India हुआ
– PFI के संबंध प्रतिबंधित संगठन SIMI से भी हैं
– PFI पर झारखंड सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया 
– आतंकवादी संगठन ISIS से भी संबंध होने का आरोप

क्या उठते रहे हैं PFI पर सवाल? 
– आतंकी फंडिंग से दंगा भड़काने का आरोप
– देशविरोधी गतिविधियां चलाने का आरोप
– CAA विरोधी प्रदर्शनकारियों को भड़काने का आरोप 
– लव जेहाद फैलाने का आरोप
– कट्टरवाद को बढ़ावा देने का आरोप

दिल्ली में दंगे भड़काने का भी आरोप  
– देशभर में नागरिकता क़ानून विरोधी प्रदर्शन किए
– नागरिकता क़ानून विरोधी प्रदर्शनों के लिए पैसा दिया  
– धरने-प्रदर्शनों में भड़काऊ भाषण से प्रदर्शन हिंसक हुए
– CAA-NPR के लिए दस्तावेज नहीं दिखाने के लिए उकसाया
– प्रदर्शनकारियों को पहचान छिपाने के लिए भड़काया गया

PFI पर कहां- कहां बैन?
– पूरी तरह बैन- झारखंड                   
– बैन की तैयारी- उत्तर प्रदेश, असम, कर्नाटक और केरल 

रिपोर्ट अशोक झा

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