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मुस्लिम युवकों को हथियार चलाने और हमला करने की ट्रेनिंग देने के कैंप चला रहे पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया

मुस्लिम युवकों को हथियार चलाने और हमला करने की ट्रेनिंग देने के कैंप चला रहे पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया
– उत्तर बंगाल समेत सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय हुआ पीएफआई
अशोक झा, सिलीगुड़ी:  देश में कट्टरपंथी ताकतें कैसे हिंदुओं के खिलाफ लगातार वर्षों से अभियान चला रही हैं। इसका एक बार फिर बड़ा खुलासा हुआ है। तेलंगाना पुलिस ने निजामाबाद जिले से कट्टरपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के 3 लीडर्स को गिरफ्तार किया है। तीनों लीडर्स कराटे को बढ़ावा देने के नाम पर मुस्लिम युवकों को हथियार चलाने और हमला करने की ट्रेनिंग देने के कैंप चला रहे थे। पुलिस के मुताबिक इन कैंपों में एक कम्युनिटी (हिंदू) को टारगेट कर युवाओं को अटैक का प्रशिक्षण दिया जा रहा था।
PFI के नेताओं से हथियार बरामद

निजामाबाद के पुलिस कमिश्नर केआर नागराजू के मुताबिक PFI के तीनों लीडर्स से कई हथियार भी बरामद किए गए हैं। इन हथियारों का इस्तेमाल ट्रेनिंग कैंपों में किया जाता था। इन कैंप में भाग लेने वाले युवाओं को एक खास समुदाय पर हमला करने के लिए प्रशिक्षित किया जाता था। उन्होंने बताया कि पकड़े गए लोगों के 30 और साथियों के बारे में भी पता चला है। उन सभी को भी जल्द ही अरेस्ट किया जाएगा. इन कट्टरपंथियों के पुराने क्रिमिनल रिकॉर्ड भी चेक किए जाएंगे। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सीमा से लगे उत्तर बंगाल में इन दिनों मुस्लिम संगठन पीएफआई यानी पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया तेजी से अपना संगठन तैयार करने में लगा है। दिल्ली में फैली हिंसा, उत्तर प्रदेश में कई देंगे, मध्य प्रदेश कर्नाटक समेत बंगाल में सीएए को लेकर हिंसा मामले में पीएफआई का नाम सामने आया था। पिछले दिनों कर्नाटक में बजरंग दल के नेता की चाकू मारकर हत्या के पीछे भी पीएफआई का हाथ होने की संभावना बताई जा रही है। उत्तर बंगाल में मालदा से कूचबिहार मुस्लिम बहुल क्षेत्र तथा बिहार के कटिहार किशनगंज पूर्णिया अररिया जिलों में पीएफआई अपनी पैठ बनाने में लगा है। इसको लेकर सुरक्षा एजेंसी चौकस हो गई है। क्योंकि इस्लाम सिद्धांत को फैलाने वाले अधिकतर मुस्लिम संगठन जिसमें पीएफआई भी शामिल है ने परस्पर मतभेदों को नजरअंदाज करते हुए अपने अंतिम लक्ष्य पर केंद्रित है। इसी मंशा को पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया ने फैलाना प्रारंभ किए है जो पिछले 85 वर्षों से विभिन्न आतंकवादी संगठनों का मूल मंत्र बन चुका है।

SIMI का नया रूप है PFI

पुलिस कमिश्नर ने बताया कि कई साल पहले बैन हो चुके संगठन SIMI के नेता ही अब PFI में सक्रिय हैं। ये लोग जगह-जगह मुस्लिम बहुल इलाकों में ऐसे कराटे कैंप करवाते हैं लेकिन असल में कराटे से इन कैंपों का कोई मतलब नहीं होता। उन्होंने बताया इन कैंपों में उन इलाकों में रहने वाले मुस्लिम युवकों को बड़ी तादाद में बुलाकर कराटे और हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी जाती है। उन्हें यह भी सिखाया जाता है कि दूसरी कम्यूनिटी पर कैसे अटैक कर अपना प्रभुत्व बनाना है।

हिंदुओं पर अटैक की दी जा रही ट्रेनिंग

उन्होंने बताया कि इन कैंपों में सीधे तौर पर हिदुओं को टारगेट करके हमले की ट्रेनिंग दी जाती है। लेकिन कुछ ऐसे लोगों को भी सबक सिखाने की इन कैंपों में ट्रेनिंग दी जाती है, जो इस्लाम पर सवाल उठाएं या पैगंबर के बारे में कुछ कहें. पुलिस कमिश्नर ने बताया कि PFI ने इस तरह के कैंप करवाने के लिए बड़ा नेटवर्क खड़ा कर लिया है। अब तक इसमें शामिल 200 लोगों का पता चला है।

कराटे कैंपों की आड़ में चल रहा प्रशिक्षण

पुलिस कमिश्नर केआर नागराजू  ने बताया कि PFI की इस मुहिम का सरगना 52 साल का अब्दुल कादिर है। वह मुस्लिम मोहल्लों में युवकों का ब्रेनवाश कर उन्हें इन कैंपों में लाता था और फिर हिंदुओं को उनका दुश्मन बताकर अटैक करने की ट्रेनिंग देता था। उसे मंगलवार को पकड़ा जा चुका है. जिन 3 लोगों को बुधवार को अरेस्ट किया गया, उनके पास से भड़काऊ साहित्य भी बरामद किया गया है। इस मामले के सामने आने के बाद PFI की गतिविधियों की गहनता से पड़ताल शुरू कर दी गई है। रिपोर्ट अशोक झा

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