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गायों के अलावा अन्य जानवरों की बलि दी जा सकती है:बदरुद्दीन अजमल

गायों के अलावा अन्य जानवरों की बलि दी जा सकती है:बदरुद्दीन अजमल
-ताकि देश की बहुसंख्यक आबादी की धार्मिक भावना को ठेस न पहुंचे
 अशोक झा, सिलीगुड़ी: कुछ ही दिनों के बाद ईद उल अजहा आने वाली है। ईद उल अजहा पर होने वाली कुर्बानी को लेकर असम  के नेता बदरुद्दीन अजमल ने मुस्लिम समुदाय देश में सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के लिए बड़ी अपील की है। संगठन की राज्य इकाई के प्रमुख बदरुद्दीन अजमल ने कहा कि कुर्बानी इस त्योहार का महत्वपूर्ण हिस्सा है, ऐसे में गायों के अलावा अन्य जानवरों की बलि दी जा सकती है। राजनीतिक दल ‘ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट’ (AIUDF) के अध्यक्ष अजमल ने एक बयान में कहा कि हिंदुओं का सनातन धर्म गाय को मां मानता है और उसकी पूजा करता है। हमें उनकी धार्मिक भावनाओं को आहत नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस्लामी मदरसे ‘दारुल उलूम देवबंद’ ने 2008 में एक सार्वजनिक अपील की थी कि बकरीद पर गाय की कुर्बानी न दी जाए और उसने यह बताया था कि इस बात का कोई उल्लेख या अनिवार्यता नहीं है कि गाय की ही बलि देनी होगी। धुबरी के सांसद ने कहा कि मैं फिर से वही अपील दोहराता हूं और अपने साथियों से गाय के बजाए किसी अन्य जानवर की बलि देने का आग्रह करता हूं, ताकि देश की बहुसंख्यक आबादी की धार्मिक भावना को ठेस न पहुंचे। अजमल ने कहा कि ईद-उज-अजहा के दौरान ऊंट, बकरी, गाय, भैंस और भेड़ जैसे अन्य जानवरों की बलि दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि चूंकि अधिकतर लोग गाय को पवित्र मानते हैं, तो मैं लोगों से गाय की कुर्बानी नहीं देने और किसी अन्य जानवर की बलि देने का विनम्र आग्रह करता हूं।” बकरीद 10 जुलाई को मनाए जाने की संभावना है। बदरुद्दीन अजमल असम के धुबरी से सांसद हैं असम विधानसभा में उनकी पार्टी के 13 विधायक हैं। बदरुद्दीन को मुसलमानों का मुखर नेता माना जाता है। भाजपा अक्सर उनके निशाने पर रहती है। वहीं, दूसरी ओर भाजपा भी उनपर बांग्लादेशियों को बसाने का आरोप लगाती रहती है। वहीं, विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने अजमल के इस बयान का समर्थन किया है।
रिपोर्ट अशोक झा

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