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दुनिया पर नशे के ज़रिए कब्जा करने की साजिश ।

अफगानिस्तान में तालिबान का कब्जा, भारत में नशे की खेप भेजने की तैयारी
-पाकिस्तान और बांग्लादेश के कट्टरपंथी कर रहे साजिश
सिलीगुड़ी: अफगानिस्तान में तालिबान का कब्जा होने से सबसे बड़ी परेशानी भारत के लिए यह होगी कि यहां उग्रवादियों समेत नशे के खेप तेजी से भेजा जाएगा। इसके लिए बांग्लादेश और पाकिस्तान में कट्टरपंथी ताकत ने अपना खेल शुरू भी कर दिया है।इसको  लेकर अभी से भारत की सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट मूड में है।कैसे यह पूरा खेल हो रहा है इसे समझना जरूरी है।

काबुल में तालिबान, तालिबान, काबुल, अफगानिस्‍तान, अफगानिस्‍तान में तालिबान, काबुल पर तालिबान का कब्‍जादो दशक के बाद तालिबान फिर से अफगानिस्‍तान में लौट आया है। काबुल समेत देश के चप्‍पे-चप्‍पे पर अब उसका कब्‍जा है। देश में अगली सरकार बनने की तैयारी है। तालिबान ने इस बात का ऐलान भी कर दिया है कि 20 साल से जारी युद्ध अब खत्‍म हो चुका है।

तालिबान दुनिया के सबसे अमीर आतंकी संगठनों में से एक है। अफगानिस्‍तान जो कभी अफीम की खेती के लिए जाना जाता था, एक बार फिर से तालिबान की अर्थव्‍यवस्‍था में बड़ा रोल अदा करने वाला है।
किसानों पर डाला अफीम की खेती का दबाव
15 अगस्‍त को काबुल पर कब्‍जे के साथ ही तालिबान ने पूरे अफगानिस्‍तान को अपने नियंत्रण में ले लिया।
पाक स्‍टूडेंट्स को लगी ड्रग्‍स की लत
अफगानिस्‍तान में स्‍थानीय तौर पर एफेड्रा का प्रयोग करके कम दरों पर क्रिस्‍टल मेथ को तैयार किया जाता है।

पिछले साल यूरोपियन मॉनिटरिंग सेंटर फॉर ड्रग्‍स एंड ड्रग एडिक्‍शन की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि अफगानिस्‍तान जो कभी हेरोईन के उत्‍पादन में नंबर वन था अब क्रिस्‍टल मेथ के उत्‍पादन में आगे बढ़ रहा है। क्रिस्‍टल मेथ की इंडस्‍ट्री इस देश में दिन पर दिन विशाल होती जा रही है। ऐसे में पाकिस्‍तान की चिंता लाजिमी है क्‍योंकि तालिबान को ड्रग्‍स स्‍मगलिंग का सरगना भी माना जाता है।

साल 2019 में पाकिस्‍तान के गृह राज्‍य मंत्री शहरयार खान अफरीदी ने कहा था कि राजधानी इस्‍लामाबाद में 75 प्रतिशत छात्राएं और 45 प्रतिशत छात्र क्रिस्‍टल मेथ के आदी हो चुके हैं।

पाकिस्‍तान को होती है ड्रग्‍स की स्‍मगलिंग

तालिबान अफीम के बिजनेस से अमीर हुआ है और किसानों की मजबूरी का फायदा उठाकर उसने जिस अफीम की खेती करवाई थी, उसकी सबसे ज्‍यादा सप्‍लाई पाकिस्‍तान में होती है. पाकिस्‍तान के युवा एक खास प्रकार की ड्रग्‍स क्रिस्‍टल मेथ के आदी हैं। ये ड्रग्‍स, हाल के कुछ वर्षों में पाक युवाओं के बीच खासी पॉपुलर हो गई है।

पाक एजेंसियों को डर है कि अफगानिस्‍तान में तालिबान के आने के बाद अब सस्‍ती दरों पर क्रिस्‍टल मेथ का उत्‍पादन होगा। पाकिस्‍तान में क्रिस्‍टल मेथ का प्रयोग स्‍कूल-कॉलेज के युवा नशे के लिए करते हैं।

किसानों पर डाला अफीम की खेती का दबाव

15 अगस्‍त को काबुल पर कब्‍जे के साथ ही तालिबान ने पूरे अफगानिस्‍तान को अपने नियंत्रण में ले लिया। 20 साल से ही तालिबान अफगानिस्‍तान में सक्रिय था। वो अमेरिकी और विदेशी फौजों की वजह से कुछ भी करने में असमर्थ था। तालिबान के कई फील्‍ड कमांडर्स ऐसे हैं जिन्‍होंने अपने दम पर कई प्रांतों में ग्रुप बना लिए हैं। दोहा में जिस समय शांति वार्ता हुई थी, उस समय मुल्‍ला बरादर ने हिंसा को कम करने की बात कही थी।

अफीम पर आधारित अर्थव्‍यवस्‍था के अलावा 4 बिलियन डॉलर या इससे ज्‍यादा की माइनिंग इकॉनमी अफगानिस्‍तान में है। रिपोर्ट्स की मानें तो अफगानिस्‍तान की करीब 75 फीसदी खदानों पर तालिबान का कब्‍जा है। तालिबान के लड़ाके अक्‍सर खेती करने वाले किसानों को अफीम की खेती के लिए मजबूर करते थे।

अफगानिस्‍तान में होती है सबसे ज्‍यादा अफीम

कंधार, अफगानिस्तान को वो हिस्‍सा है जहां पर गेहूं सबसे ज्‍यादा मात्रा में उगाया जाता है। मगर गेहूं की कम कीमत, बेरोजगारी और गरीबी ने क्षेत्र के कई किसानों को गेहूं की खेती छोड़ अफीम की खेती अपनाने के लिए मजबूर कर दिया। तालिबान का डर था या कोई और मजबूरी किसानों के लिए अफीम की खेती करना और अफीम बेचना, परिवार का पेट पालने और उसकी मदद करने का एकमात्र जरिया बन गया था।

अफगानिस्तान में बहुत बड़े पैमाने पर अफीम की खेती होती है। देश में हेरोइन के निर्माण में इस्‍तेमाल होने वाले कच्चे माल की करीब 90 फीसदी सप्‍लाई सिर्फ अफगानिस्‍तान से ही होती है। अफगानिस्तान में पूर्व में तालिबान के चंगुल में रहे दक्षिणी कंधार और हेलमंद प्रांत गैर-कानूनी ड्रग्‍स की बड़े पैमाने पर खेती करने वाले इलाके हैं।

News Co-Ordinator and Advisor, Khabar Aajkal Siliguri

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